Friday, September 1, 2023

माता-पिता की उम्मीदों का भार ढोते बच्चे

 माता-पिता की उम्मीदों का भार ढोते बच्चे

 
माता-पिता की उम्मीदों का भार ढोते बच्चे
माता-पिता की उम्मीदों का भार ढोते बच्चे

कोटा में हर साल कई सारे बच्चे खुदकुशी कर लेते हैं। माता-पिता ने खून-पसीने की कमाई खर्च कर दी, आईआईटी पास नहीं किया, तो समाज में क्या मुंह दिखाएंगे? भविष्य का क्या होगा? रिश्तेदार हंसेंगे। यही सब सोचता हुआ कोई बच्चा अपनी जान ले लेता है। दरअसल, कोई व्यक्ति अपने जीवन में जो ऊंचाई हासिल नहीं कर पाता, वह अपने बच्चों से अपेक्षा करता है, पर बच्चा संतान तो है ही, वह एक स्वतंत्र मनुष्य भी है। अपने तरीके से जीने का उसका अधिकार निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर है। आईएएस, आईपीएस, नीट जैसी परीक्षाओं को आखिर कौन सा बच्चा पास नहीं करना चाहता? सभी ऐसा चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जिस परिश्रम की आवश्यकता होती है, वह सभी नहीं कर पाते। आईक्यू लेवल, जल्दी सीखने और लंबे समय तक याद रखने की क्षमता भी सबकी एक सी नहीं होती। देखा-देखी मां-बाप बच्चे को कोटा के महंगे संस्थानों में भेजते हैं। वे अपने अहं को बच्चों के जरिये तुष्ट करना चाहते हैं। बच्चा आईआईटी में आ गया, तो समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा, इसीलिए बच्चे को लालच दिया जाता है, बस कुछ वर्ष कड़ी मेहनत कर लो; आईएएस-आईपीएस बन जाओ, तो गाड़ी, बंगला, वीआईपी सुख आपके चरणों में होंगे।

मगर बच्चा कई बार चाहकर भी मेहनत के बावजूद अपेक्षित रिजल्ट नहीं ला पाता। असल में, कोचिंग सेंटर बच्चों को कामयाब बनाने की गारंटी नहीं हैं। जब तक जरूरी विषयों में रुचि और ज्ञान की भूख न हो, सफलता कतई संभव नहीं। विद्या साधना है, तपस्या है, इसके लिए ऋषि बनना पड़ता है, सारी इंद्रियों को वश मेें करना पड़ता है। यह सबके बस की बात नहीं है। बच्चा डॉक्टर बनेगा, इंजीनियर बनेगा, क्रिकेटर, गायक या क्या बनेगा, यह माता-पिता के हाथ में नहीं होता, यह बच्चे की रुचि, लगन, मेहनत, समर्पण और चरित्र से जुड़ा मामला है। बच्चा कोई रोबोट तो नहीं कि जिसे पढ़ने के लिए प्रोग्राम किया जा सके। बच्चे की सफलता या विफलता भी मां-बाप की सफलता या विफलता नहीं है, इसीलिए इस पर इतराने या लजाने की जरूरत नहीं है।

लिहाजा बच्चे को सिर्फ मनुष्य बनाइए, ताकि वह अपने और दूसरों के जीवन का महत्व समझे। सफलता कोई बड़ी परीक्षा पास करना नहीं है। उसमें सर्वश्रेष्ठ आना भी सफलता नहीं है, बल्कि मनुष्य बन जाना ही असल सफलता है। ऐसा मनुष्य, जो धर्म को जाने, ईश्वर को जाने, समाज को जाने और प्रकृति को जाने। अगर कोई अनपढ़ आदिवासी उजाड़ बियाबान में हरा-भरा जंगल खड़ा कर दे, तो मेरे विचार से वह सैकड़ों आईएएस-आईपीएस से कई गुना ज्यादा सफल है।

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