इसरो ने श्रीहरिकोटा केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया ●सूरज के अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठाएगा अभियान

श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से शनिवार को पीएसएलवी-सी57 रॉकेट की मदद से आदित्य एल-1 को प्रक्षेपित किया गया। ● एजेंसी





एल 1 तक ऐसे पहुंचेगा
● श्रीहरिकोटा से रवाना हुए अंतरिक्ष यान को वैज्ञानिक शुरू में पृथ्वी की निचली कक्षा में रखेंगे
● बाद में इसकी कक्षा का आकार बढ़ाया जाएगा। अंतरिक्ष यान को फिर इसमें लगी प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल कर एल1 बिंदु की ओर भेजा जाएगा, ताकि यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के प्रभाव से बाहर निकल सके
● बाद में, इसे सूर्य के पास एल1 बिंदु के इर्द-गिर्द बड़ी कक्षा में भेजा जाएगा। आदित्य को प्रक्षेपण से लेकर एल1 बिंदु तक पहुंचने में चार महीने का समय लगेगा
श्रीहरिकोटा, एजेंसियां। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग के दसवें दिन शनिवार को फिर से इतिहास रच दिया। देश के पहले सूर्य अभियान ‘आदित्य एल 1’ का श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया गया। पीएसएलवी-सी57 रॉकेट के एक्सएल वर्जन से आदित्य एल1 को सुबह 1150 बजे प्रक्षेपित किया गया। यह मिशन सूर्य से संबंधित रहस्यों से पर्दा हटाने में मदद करेगा।
इसरो ने बताया कि आदित्य एल 1 यान रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया है। सूर्य की ओर इसकी यात्रा शुरू हो गई है। आदित्य-एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष आधारित वेधशाला है। यह अंतरिक्ष यान 125 दिन में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर लंबी यात्रा करने के बाद लैग्रेंजियन बिंदु यानी एल1 के आसपास एक कक्षा में स्थापित होगा, जिसे सूर्य के सबसे करीब माना जाता है। यह यान वहीं से सूर्य पर होने वाली विभिन्न घटनाओं का अध्ययन करेगा। ‘आदित्य एल1’ विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययन के साथ ही इसकी तस्वीरें धरती पर भेजेगा।
इसरो ने बताया कि आदित्य-एल1 सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करेगा। इस यान में लगे उपकरण इसरो के विभिन्न केंद्रों के सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं। पृथ्वी और सूर्य के बीच पांच लैग्रेंजियन बिंदु (या पार्किंग क्षेत्र) हैं, जहां पहुंचने पर कोई वस्तु रुक जाती है। लैग्रेंज बिंदुओं का नाम इतालवी-फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ-लुई लैग्रेंज के नाम पर पुरस्कार प्राप्त करने वाले उनके अनुसंधान पत्र के लिए रखा गया। लैग्रेंज बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित होता है, जिससे किसी उपग्रह को यहां रोकने में आसानी होती है।
बड़ी छलांग P14
चंद्रयान-3 चांद पर रोवर प्रज्ञान को विश्राम दिया गया
चंद्रयान-3 मिशन के तहत चांद पर गए रोवर प्रज्ञान ने लैंडर विक्रम से सौ मीटर की दूरी तय कर ली है, अब इसे विश्राम दे दिया गया है। इसरो ने शनिवार को बताया कि प्रज्ञान ने चांद पर अपना काम पूरा कर लिया। अब यह स्लीप मोड में है। पेलोड में एकत्रित डाटा लैंडर विक्रम के जरिए पृथ्वी तक पहुंच गया है। बैटरी भी पूरी तरह चार्ज है। उम्मीद की जा रही है कि सूर्य का प्रकाश पड़ने पर 22 सितंबर को ये दोबारा काम करना शुरू करेगा।
सूर्य मिशन के सफल प्रक्षेपण के लिए हमारे वैज्ञानिकों को बधाई। अंतरिक्ष की बेहतर समझ विकसित करने के लिए हमारे वैज्ञानिक प्रयास जारी रहेंगे। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
संपूर्ण मानवता की सेवा के ध्येय के साथ आज नए भारत की सामर्थ्य का प्रतीक आदित्य एल 1 लॉन्च हो गया। देशवासियों को शुभकामनाएं।
-योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, यूपी
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