Monday, September 4, 2023

कांग्रेस सतनामी समाज का भरोसा जीतने में जुटी

 कांग्रेस सतनामी समाज का भरोसा जीतने में जुटी

 
कांग्रेस सतनामी समाज का भरोसा जीतने में जुटी
कांग्रेस सतनामी समाज का भरोसा जीतने में जुटी

पार्टी ने रणनीति में बदलाव किया

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलेगी। गुरु बालदास के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी समाज का भरोसा जीतने की पूरा प्रयास करेगी, ताकि चुनाव में सतनामी समाज के गुरु बालदास के असर को कम किया जा सके।

नई दिल्ली news छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहती है। पार्टी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर अलग से रणनीति बनाने में जुटी है, ताकि चुनाव से ठीक पहले गुरु बालदास के भाजपा में शामिल होने के असर को कम किया जा सके। गुरु बालदास सतनामी समाज के धर्म गुरु हैं। सतनामी समाज अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर असर है।

प्रदेश कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं कि गुरु बालदास का समाज पर अब पहले जैसा असर नहीं रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार ने सीधे सतनामी समाज तक पहुंचने की कोशिश की है। समाज के लिए कई विशेष योजनाओं के साथ उन्हें सरकार की दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा है। ऐसे में गुरु बालदास के भाजपा में शामिल होने से चुनाव पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

वरिष्ठ स्थानीय नेता ने कहा कि हम अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर अपना प्रदर्शन दोहराने के लिए चुनाव में उतरेंगे। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एससी के लिए आरक्षित दस में से सात सीटें जीती थीं।

छत्तीसगढ़ की 90 में 20 सीट पर सतनामी समाज का असर है। इनमें से दस सीट आरक्षित हैं। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में गुरु बलदास ने राजनीतिक पार्टी का गठन किया था और 21 सीट पर चुनाव लड़ा था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने एससी के लिए आरक्षित दस में सिर्फ दो सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे। गुरु बालदास की पार्टी चुनाव में कोई सीट नहीं जीत पाई।

गुरु बालदास के पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने से कांग्रेस वोट का विभाजन हुआ और इसका फायदा भाजपा को मिला था। भाजपा एससी के लिए आरक्षित दस में 9 सीट जीतने में सफल रही। पर मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ मतभेदों के बाद गुरु बालदास ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। वर्ष 2018 में कांग्रेस को इसका फायदा मिला और पार्टी ने एससी के लिए आरक्षित दस में सात सीट पर जीत दर्ज की।

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