Monday, September 4, 2023

Today news hindi अब सूर्य की ओर 04/09/2023

 अब सूर्य की ओर


अब सूर्य की ओर

Today news hindi  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया। योजना के अनुसार, आदित्य-एल1 का संचालन सफलतापूर्वक चल रहा है। भारत ने इसरो के ही पीएसएलवी रॉकेट के साथ अपना पहला सौर अभियान शुरू किया है और भारत ऐसा करने वाला दुनिया का तीसरा देश है। एशिया में इससे पहले किसी भी देश ने सौर अभियान नहीं चलाया है। अब आदित्य एल1 यान 125 दिन की यात्रा करके सूर्य के करीब एक ऐसी परिक्रमा कक्ष में पहुंच जाएगा, जहां से सूर्य का अध्ययन सुरक्षित ढंग से किया जा सके। सूर्य के पास जाना वैसे तो खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि उसके पास जाने की कोशिश करने वाली कोई भी चीज खाक हो सकती है। कुल मिलाकर, सूर्य अभी पृथ्वी के विज्ञान से बहुत दूर है। आदित्य एल1 पृथ्वी से महज 15 लाख किलोमीटर दूर जाकर उसकी परिक्रमा करने लगेगा, जबकि पृथ्वी से सूर्य 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। मतलब, सूर्य की ओर जाने के बावजूद आदित्य-एल1 तुलनात्मक रूप से पृथ्वी के ही करीब रहेगा। सूर्य के 15 लाख किलोमीटर दूर पहुंचना असंभव है, इस दिशा में अमेरिका या नासा की कुछ कोशिशें नाकाम हुई हैं।

आदित्य-एल1 के साथ खास बात यह है कि यह सूर्य को सतत देखेगा और किसी भी प्रकार के ग्रहण का शिकार नहीं होगा। अंतिम रूप से इस यान के साथ सात पेलोड या उपकरण संलग्न रहेंगे। इन उपकरणों के जरिये जो आंकडे़ या तथ्य अंतरिक्ष में जुटाए जाएंगे, वे सब पृथ्वी पर अध्ययन के लिए उपलब्ध होंगे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण पेलोड या उपकरण विजबिल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) को माना जा रहा है। यह उपकरण विश्लेषण के लिए प्रतिदिन लगभग 1,440 सौर छवियों को दर्ज करेगा। यह यान सौर शक्ति की मदद से अपने लिए ऊर्जा पैदा करने में सक्षम है और यही नहीं, आगे अपनी निर्धारित कक्ष में स्थापित होने के लिए भी यह यान ऊर्जा पैदा कर सकता है। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य प्रतिदिन 24 घंटे सूर्य का निरीक्षण करने की क्षमता को बढ़ाना है। सूर्य के अवलोकन से उसकी गतिविधि पर बारीकी से नजर रखने में मदद मिलेगी। आदित्य-एल1 द्वारा किए गए अवलोकन से सूर्य की सतह और सौर तूफानों के दौरान उच्च-ऊर्जा कणों के उत्सर्जन के बीच संबंध को समझने में मदद मिलेगी।

उधर, चंद्रयान-3 पूरी तरह से सफल रहा है और चांद पर मौजूद रोवर को इसरो ने साइलेंट मोड में डाल दिया है। अब सबकी नजर गगनयान पर टिक गई है। आदित्य-एल1 के प्रक्षेपण के अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया है कि देश का अगला अंतरिक्ष अभियान गगनयान की पहली परीक्षण उड़ान होगी। सब कुछ ठीक रहा, तो भारत अक्तूबर महीने में गगनयान को प्रक्षेपित करेगा। विगत अनेक महीनों से गगनयान की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गगनयान अभियान के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी के 400 किलोमीटर दूर मौजूद कक्ष में भेजने की योजना है। योजना के अनुसार, गगनयान सात दिन अंतरिक्ष में परिक्रमा करने के बाद पृथ्वी पर लौट आएगा। यहां धरती पर अंतरिक्ष यात्रियों की सफल या सुरक्षित वापसी ही सबसे बड़ी चुनौती है। जहां एक ओर, इसरो को पूरी सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करने के बाद ही कदम आगे बढ़ाना चाहिए, वहीं सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन अभियानों में संसाधन या किसी भी प्रकार की कमी न आने दे।

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