Thursday, September 7, 2023

विदेश मंत्री ने कहा-राष्ट्रपति या पीएम रहे हैं जिन्होंने किन्हीं कारणों से बैठकों में नहीं आने का फैसला किया

देश दुनियाँ

विदेश मंत्री ने कहा-राष्ट्रपति या पीएम रहे हैं जिन्होंने किन्हीं कारणों से बैठकों में नहीं आने का फैसला किया‘किसी के न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता’
 
‘किसी के न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता’
जी20 में भाग लेने मंगलवार देर रात नई दिल्ली पहुंचे नाइजीरिया के राष्ट्रपति। ● प्रेट्र
‘किसी के न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता’
ये नेता बैठक में भाग लेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापानी पीएम फुमियो किशिदा और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा उन G20 नेताओं में शामिल हैं। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं।

दुनिया में शीर्ष पर भारत

वाशिंगटन, एजेंसी। दिल्ली में जी-20 बैठक के शुरू होने से पहले विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक की अपर्णा पांडे ने कहा कि पहली बार भारत और कोई दक्षिण एशियाई देश जी-20 बैठक की मेजबानी कर रहा है। जी-20 बैठक की मेजबानी के साथ ही भारत ने सिद्द कर दिया है कि वो दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है।

बैठक को लेकर अमेरिका का चीन पर निशाना

वाशिंगटन, एजेंसी। दिल्ली में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन को लेकर अमेरिका ने चीन की घेराबंदी की है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलविन ने मंगलवार को कहा कि चीन को तय करना है कि वो भारत में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में क्या भूमिका निभाना चाहता है।

सुलविन ने स्पष्ट कहा कि बीजिंग बैठक में आना चाहता है और बिगाड़ने वाले की भूमिका निभाना चाहता है तो उसके पास इसके लिए विकल्प उपलब्ध है। उन्होंने, कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव के बहाने शिखर सम्मेलन को प्रभावित करना चीन पर निर्भर है।

भारत प्रेरणा का स्रोत बनेगा सुलिवन ने कहा कि जी20 का वर्तमान अध्यक्ष भारत सदस्य देशों को कई मसलों और वैश्विक चुनौतियों पर बेहतर करने के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। भारत जलवायु, बहुपक्षीय विकास, बैंक सुधार, ऋण राहत, प्रौद्योगिकी और भूराजनीतिक सवालों से इतर समस्या-समाधान और विकासशील देशों के लिए काम करने पर सभी देशों को एकजुट करेगा। रूस- यूक्रेन युद्ध ने सामाजिक और आर्थिक परिणामों को तबाह किया है। गरीब देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

कठिन दौर में संभाल रहे जिम्मेदारी

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, भारत के पास जी-20 की जिम्मेदारी दुनिया के लिए कठिन साबित हो रहे दौर में है। दुनिया कोरोना महामारी, यूक्रेन युद्ध, जलवायु परिवर्तन, कर्ज, उत्तर-दक्षिण के बीच मतभेद व तीखे पूर्व-पश्चिम ध्रुवीकरण से घिरी है। इन सब के बीच शिखर सम्मेलन का प्रयास साझा जमीन खोजना है।

नई दिल्ली एजेंसी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जी-20 सम्मेलन में अनुपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि किसी के न आने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अतीत में भी ऐसे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने किन्हीं कारणों से ऐसी प्रमुख बैठकों में नहीं आने का फैसला किया। उनके बजाय देश का प्रतिनिधित्व किसी अन्य प्रतिनिधि द्वारा किया गया।

नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को आयोजित होने जा रहे जी-20 सम्मेलन से पहले एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, जी-20 में अलग-अलग समय पर कुछ ऐसे राष्ट्राध्यक्ष रहे हैं, जिनकी नुमांयदगी उनके किसी प्रतिनिधि ने की। ऐसे कुछ मौके रहे हैं, जब एक या दो, कभी-कभी तीन राष्ट्राध्यक्ष भी खुद नहीं आए। इसलिए इन बातों का कोई असर नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा, मैं जानता हूं कि देश एक-दूसरे के संपर्क में हैं। वे अंतिम दस्तावेज तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं।

No comments: