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लखनऊ घोसी उपचुनाव में सपा की जीत
आज की खबर घोसी के अखाड़े में दलबदलू और ‘बड़बोले’ चित

लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जीत का जश्न मनाते पार्टी कार्यकर्ता
● राजकुमार शर्मा
लखनऊ घोसी महज 17 महीने पहले घोसी में जयघोष करने वाले दारा सिंह चौहान शुक्रवार को उसी अखाड़े में चारों खाने चित हो गए। घोसी उपचुनाव के सियासी संदेश ने न सिर्फ दलबदलुओं को आईना दिखा दिया है, बल्कि ‘बड़बोलों’ की बोलती भी बंद कर दी है। दारा सिंह पर दांव लगाना भाजपा को भारी पड़ा। पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर कैडर वोट ने उन्हें स्वीकारने से इंकार कर दिया। भाजपा को अब 2024 के लिए पूरब की इस पथरीली जमीन पर कमल खिलाने के लिए नये सिरे से कवायद करनी होगी।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़ साइकिल पर सवार होने वाले दारा सिंह चौहान घोसी सीट से विधायक चुने गए थे। मगर उनकी सोच के अनुरूप सूबे में सपा की सरकार नहीं बनीं। फिर वे भाजपा में वापसी के प्रयासों में जुट गए थे। बीते माह वे सपा और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्हें पार्टी ने प्रत्याशी भी बना दिया। मगर पहले ही दिन से उन्हें लेकर क्षेत्र में नाराजगी देखी गई। चुनाव प्रचार के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना भी सामने आई थी। घोसी में सामाजिक ताना-बाना दुरुस्त करने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुईं। भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान खुद सजातीय वोटों में सेंधमारी रोकने में नाकाम रहे।
जबकि हाल ही में एनडीए का हिस्सा बने ओमप्रकाश राजभर भी राजभरों को दो फाड़ होने से नहीं रोक पाए। एनडीए के अन्य सहयोगी निषाद पार्टी हो या अपना दल (सोनेलाल) भी उन जातियों का वोट नहीं दिला सके, जिसकी वे नुमाइंदगी करने का दावा करते हैं। बसपा के चुनाव मैदान में न होने का लाभ भी भाजपा प्रत्याशी नहीं उठा पाए। सवर्ण वोटरों में भी नाराजगी साफ दिखी। अभी तक गोला, स्वार, खतौली, रामपुर और घोसी विधानसभा सीटों के अलावा मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए हैं।
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