खबर आजतक डिजिटल क्रांति और बदलते भारत की तसवीर दिखाती पुस्तक
सभ्यता के शुरुआती दिनों में संकेतों से लेकर पक्षियों, हरकारों और मुनादी करवाने जैसे संचार के साधन प्रचलित थे। यहां से यह सफर आगे बढ़ता हुआ चिट्ठी-पत्री, टेलिग्राम से होता हुआ, मोबाइल, ईमेल, एसएमएस और सोशल मीडिया जैसे आधुनिक संचार माध्यमों तक आ पहुंचा है।
टेक्नोलॉजी की इस बढ़ती विश्वव्यापी रफ्तार में भारत ने पिछले दो दशकों में नई उड़ान भरी है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई इस तरक्की के कारण ही ‘टेकेड’ शब्द प्रचलन में आया। ‘टेकेड’—‘टेक्नोलॉजी’ और ‘डिकेड’ शब्द के योग से बना है। टेकेड यानी प्रौद्योगिकी के प्रभाव से संचालित ‘प्रौद्योगिकी-दशक’। इस शब्द को कोविड-19 से कुछ पहले प्रचार और प्रमुखता मिली।
भारत के प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ते प्रभुत्व का गंभीर और विशद् विश्लेषण हाल ही में आई पुस्तक ‘इंडियाज टेकेड’ में किया गया है। इस पुस्तक के लेखक प्रसिद्ध पत्रकार नलिन मेहता हैं। पुस्तक में पिछले दशक में हुई डिजिटल क्रांति से बदलते हुए भारत की कहानी है। इस क्रांति को लाने के लिए सस्ते मोबाइल फोन, सस्ता डाटा और डिजिटल आईडी प्रणाली को विकसित और प्रचलित किया गया। यूपीआई जैसी डिजिटल मनी ट्रांजेेक्शन सिस्टम को देश में ही नहीं विदेशों में भी सफल बनाया। इसमें सिस्टम के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति के महत्त्वपूर्ण योगदान को भी रेखांकित किया गया है। डिजिटल तकनीक ने हमारे दैनिक जीवन को कैसे बदल दिया, इसे ठोस आंकड़ों के जरिये पुस्तक में बहुत बेहतर और सरल शब्दों में समझाया गया है। संक्षेप में कहा जाए तो यह पुस्तक डिजिटल होते नए भारत की कहानी को तथ्यों के साथ पुख्ता ढंग से पाठकों के सामने रखती है।
अरुण कुमार जैमिनि

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