Wednesday, September 13, 2023

जागरूक रहकर ही निपाह वायरस से बचा सकते हैं जान

जागरूक रहकर ही निपाह वायरस से बचा सकते हैं जान

 
जागरूक रहकर ही निपाह वायरस से बचा सकते हैं जान
जागरूक रहकर ही निपाह वायरस से बचा सकते हैं जान
जागरूक रहकर ही निपाह वायरस से बचा सकते हैं जान

पहली बार कहां मिला

वर्ष 1998 और 1999 में इसे पहली बार मलेशिया के एक गांव सुनगई निपाह में देखा गया था।

भारत में कब आया सबसे पहले 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में वायरस पाया गया था। उसके बाद 2007 के नादिया जिले में यह वायरस आया। बाद में 2018 में केरल में प्रकोप देखा गया जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी।

केरल में दो की मौत के बाद नमूने जांच को भेजे

कोझिकोड। केरल सरकार ने निपाह वायरस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए पांच नमूने जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे हैं। सरकार ने यह निर्णय कोझिकोड जिले में दो लोगों की अप्राकृतिक मौत का पता चलने के बाद लिया है। केरल स्वास्थ्य विभाग ने दो लोगों की मौत के बाद सोमवार को कोझिकोड जिले में निपाह वायरस के संबंध में जिलास्तरीय अलर्ट जारी किया। ऐसा संदेह है कि इन लोगों की मौत निपाह वायरस से संक्रमित होने के कारण हुई। जांच के लिए जो नमूने विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे गए हैं, उनमें से एक नमूना मृतक का और चार उसके संबंधियों के हैं।

4 से 14 दिनों के अंदर दिखता है इसका लक्षण

कितना खतरनाक है यह वायरस

निपाह वायरस को कम संक्रामक, लेकिन ज्यादा घातक माना जाता है। इससे मृत्यु दर ज्यादा होती है। इसमें मरीज की हालत गंभीर होने पर 24 से 48 घंटे में कोमा में जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति की निपाह से मौत हुई है तो परिवार के दूसरे सदस्य भी संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार करते वक्त सावधानी रखने की जरूरत है।

कहां से फैलता है

यह रोग पटरोपस जीनस के ‘फ्रूट बैट’ या फ्लाइंग फॉक्स से फैलता है, जो निपाह और हेंड्रा वायरस के प्राकृतिक स्रोत हैं। यह वायरस चमगादड़ के मूत्र, मल, लार व जन्म के समय तरल पदार्थों में मौजूद होता है।

बीमारी के लक्षण

इस बीमारी में इंसान को सांस संबंधी समस्या, दिमाग में सूजन, बुखार होना, सिरदर्द, खांसी आना, उल्टियां और मानसिक भ्रम जैसे हालात पैदा होते हैं। निपाह से संक्रमित मनुष्यों की गहन देखभाल की जरूरत होती है।

नई दिल्ली, एजेंसी। केरल में दो संदिग्ध मौतों के बाद राज्य सरकार ने निपाह वायरस को लेकर स्वास्थ्य अलर्ट जारी किया है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, संक्रमण को घटाने या खत्म करने का एकमात्र उपाय लोगों को जागरूक करना है। यह एक एक जूनोटिक वायरस है। यानी जानवरों के जरिये इंसानों में फैलता है। इस वायरस से संक्रमित मामलों में मृत्यु दर 40 से 75 के बीच रहती है। वायरस के लक्षण इंसान में 4 से 14 दिनों के भीतर दिखते हैं।

रोकथाम का उपाय

मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए इस वायरस का कोई दवा या टीका नहीं है। संगठन का सुझाव है कि खाने से पहले फलों को अच्छी तरह धोएं, मास्क लगाकर रखें और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ जाने के बाद सावधानियां बरतें।

https://youtu.be/0hpVZ-zhgzo?si=7XPcJql9KOm95KEj

सनातन धर्म पर सियासी संग्रामगठबंधन बना ही सनातन विरोध के लिए भाजपा

 
सनातन धर्म पर सियासी संग्राम
भाजपा इंडिया गठबंधन से स्पष्ट प्रस्ताव लाने का आग्रह करेगी कि वह द्रमुक की आलोचना से पूरी तरह अलग करता है और यह उनका एजेंडा नहीं है।-रविशंकर प्रसाद, भाजपा नई दिल्ली news भाजपा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के लिए सनातन धर्म पर हमला विपक्षी गठबंधन इंडिया का गुप्त एजेंडा है। पार्टी ने इस धर्म के बारे में द्रमुक नेताओं की आलोचनात्मक टिप्पणियों के बीच विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए।भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का गठबंधन का गठन ही सनातन धर्म के विरोध में हुआ है। यह कांग्रेस की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। नड्डा ने ‘एक्स’ पर कहा, गठबंधन की मुंबई बैठक के दो दिन बाद उदयनिधि का बयान आना। फिर प्रियांक खड़गे का सनातन पर आघात और अब द्रमुक के मंत्री द्वारा ये स्वीकार करना कि विपक्षी गठबंधन का गठन ही सनातन धर्म के विरोध में हुआ था। यह कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

उधर, भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। कहा, सोनिया गांधी इस मामले पर चुप्पी साधे रहेंगी तो स्पष्ट हो जाएगा कि सनातन धर्म का विरोध करना इंडिया के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है। प्रसाद ने द्रमुक के एक नेता की उस टिप्पणी का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि सनातन का विरोध करना संगठन का एजेंडा है।


राजनाथ सिंह ने तवांग को असम से जोड़ने वाली सुरंग का शुभारंभ किया ईटानगर, एजेंसी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू से मंगलवार को ऑनलाइन देशभर में कुल 90 प्रमुख सीमा बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। इनमें अरुणाचल प्रदेश में 36 सड़क और पुल परियोजनाओं का ऑनलाइन शुभारंभ शामिल है। इनमें तवांग को असम के बालीपारा से जोड़ने वाली, सामरिक रूप से अहम नेचिफू सुरंग भी शामिल है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की यह परियोजनाएं 2,941 करोड़ रुपये की लागत की हैं। े देशभर में 22 सड़कों, 63 पुलों, नेचिफू सुरंग, दो हवाई पट्टियों और दो हेलीपैड का ऑनलाइन शुभारंभ किया।


फैसला 47 साल बाद बुंदेलखंड में नया शहर नोएडा की तर्ज पर बसाने की तैयारी 

शामली में पीएसी वाहिनी को कैबिनेट की मंजूरी हजार एकड़ जमीन पर बनेगा शहर

 
शामली में पीएसी वाहिनी को कैबिनेट की मंजूरी
लखनऊ में मंगलवार को कैबिनट बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
शामली में पीएसी वाहिनी को कैबिनेट की मंजूरी
कैराना को लेकर सरकार पहले से ही रही है गंभीर

कैबिनेट ने शामली में नई पीएसी वाहिनी के लिए आवासीय, अनावासीय भवनों के निर्माण को मंजूरी दी है। इस पर 378.08 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गौरतलब है कि कैराना के पलायन मुद्दे को लेकर सरकार पहले से ही गंभीर रही है। वहीं संभल पुलिस लाइन में आवासीय, अनावासीय भवनों के निर्माण के प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इस पुलिस लाइन में शहीद स्मारक, संग्रहालय और ट्रैफिक पार्क का निर्माण करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस पर करीब 372.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

पर्यटक आवास गृह पीपीपी मोड में चलेंगे

लखनऊ। पर्यटन विभाग के बंद पड़े या घाटे में चल रहे पर्यटक आवास गृह अब पीपीपी मोड पर विकसित व संचालित किए जाएंगे। प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि बुलंदशहर के नरौरा पर्यटक आवास गृहों और मथुरा स्थित गोकुल रेस्टोरेंट को पीपीपी मोड पर विकसित करने के लिए लीज पर दिया जा रहा है। इसके अलावा कांधला शामली, खुर्जा बुलंदशहर पक्षी विहार एटा को भी लीज पर देने की तैयारी है।

35

लखनऊ योगी सरकार नोएडा की तर्ज पर बुंदेलखंड में नया औद्योगिक शहर बनाने जा रही है। झांसी-ग्वालियर मार्ग पर बनने वाली इस औद्योगिक टाउनशिप के लिए 33 राजस्व गांवों की 35 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जएगी। इस जमीन के अधिग्रहण में 6312 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा शामली में पीएसी की नई वाहिनी को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि इस निर्णय से बुंदेलखंड के जिलों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही यहां रोजगार की असीमित सुविधाओं का सृजन संभव हो सकेगा। इससे वन ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने की मुहिम में तेजी आएगी। उत्तर प्रदेश में इससे पूर्व 1976 में औद्योगिक शहर नोएडा के गठन का निर्णय लिया गया था और अब 47 वर्षों बाद नए शहर की स्थापना का निर्णय लिया गया है।

सुरेश खन्ना ने बताया कि झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा इंडस्ट्रियल टाउनशिप को विकसित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।

अन्य फैसले

सहारनपुर समेत तीन शहरों में ई-बसें चलेंगी

लखनऊ। राज्य सरकार सहारनपुर, अयोध्या और फिरोजाबाद में एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाने जा रही है। प्रारंभिक दौर में 100-100 बसें चलाने की योजना है। इसके लिए विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। प्रदेश के 17 शहरों में चार चरणों में 4665 इलेक्ट्रिक एसी बसें चलाई जाएंगी। ें मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ।


मेरठ मेडिकल कॉलेज से बंदी की फरारी में पांच पुलिसकर्मी निलंबित

 
मेरठ मेडिकल कॉलेज से बंदी की फरारी में पांच पुलिसकर्मी निलंबित
मेरठ मेडिकल कॉलेज से बंदी की फरारी में पांच पुलिसकर्मी निलंबित मेरठ मेडिकल कॉलेज में बरेली पुलिस की कस्टडी से बंदी की फरारी मामले में बरेली एसएसपी सुशील घुले ने हेड कांस्टेबल समेत पांचों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी निर्देश दिए हैं।

नौ सितंबर को बरेली पुलिस लाइन की एक गारद आंवला में चोरी के मामले में पकड़े गए बंदी काले खां को इलाज के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज लेकर आई थी। काले खां को फेफड़े और लीवर की समस्या होने पर रेफर किया गया था। हेड कांस्टेबल खेम सिंह, सिपाही यूसुफ, राहुल कुमार, आकाश और सुधांशु यादव बंदी काले खां को लेकर मेडिकल पहुंचे और उपचार शुरू कराया था। सोमवार सुबह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर काले खां भाग निकला था और एक पुलिसकर्मी का फोन भी ले गया था।

सामने आई पुलिस की लापरवाही एसएसपी सुशील घुले के मुताबिक जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि जिस वक्त काले खां फरार हुआ, सभी पुलिसकर्मी सो रहे थे। बंदी के फरार होने के बाद पहले तो पुलिसकर्मी उसे तलाशते रहे, पर कामयाबी नहीं मिली तो स्थानीय पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर सभी पुलिसकर्मियों को हिरासत में ले लिया था।


वन संरक्षक के 709 पदों पर भर्ती को आवेदन 20 से


लखनऊ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग वन रक्षक के 693 और वन्य जीव रक्षक के 16 कुल 709 पदों पर भर्ती के लिए 20 सितंबर से 10 अक्तूबर तक आवेदन लेगा। 17 अक्तूबर तक संशोधन हो सकेगा।

आवेदन http//upsssc.gov.in लिए जाएंगे। भर्ती के लिए प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी-2022) वाले पात्र होंगे। आयोग के सचिव अवनीश कुमार सक्सेना ने मंगलवार को भर्ती संबंधी विज्ञप्ति जारी करते हुए आवेदन मांगा है। आवेदन के बाद छंटनी किए जाने वाले मुख्य भर्ती परीक्षा के लिए पात्र होंगे। 25 रुपये आवेदन शुल्क है। मुख्य परीक्षा के लिए बाद में शुल्क लिया जाएगा। यूपी बोर्ड से इंटर या मान्यता प्राप्त संस्था से इसके समकक्ष परीक्षा पास वाले पात्र होंगे।


डीजल वाहनों पर अतिरिक्त कर लगाने का प्रस्ताव नहीं
 
डीजल वाहनों पर अतिरिक्त कर लगाने का प्रस्ताव नहीं

नई दिल्ली एजेंसी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को उत्सर्जन में कटौती में मदद के लिए डीजल वाहनों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाने की आवश्यकता की बात कही। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है।

वाहन विनिर्माताओं के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के 63वें वार्षिक सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि बढ़ता प्रदूषण स्तर स्वास्थ्य के लिए चिंता का गंभीर विषय बन गया है। डीजल वाहनों की बिक्री को कम करने के लिए करों बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिए थे कि उन्होंने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे वित्त मंत्री को सौंपा जाएगा।

एक्स पर पोस्ट लिखकर कहा कि प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है

उन्होंने कहा, डीजल इंजन/वाहनों पर मैं 10 अतिरिक्त जीएसटी लगाने का अनुरोध करूंगा। केवल इसी तरह डीजल वाहनों को धीरे-धीरे हटाया जा सकता है। हालांकि, थोड़ी देर बाद उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखा, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। जानकारी के अनुसार बता दें कि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उत्सर्जन में कटौती के लिए स्वच्छ ईंधन अपनाने की जरूरत है।


आरक्षण को सुलझाए रखना ही समाधान मणिपुर से लेकर महाराष्ट्र व देश के अन्य राज्यों में भी आरक्षण और सरकार प्रायोजित विकास व अवसरों में भागीदारी को लेकर टकराव और तनाव की स्थितियां विकराल होती जा रही हैं।

 

भारत में जनतांत्रिक विमर्श में आरक्षण का प्रश्न रह-रहकर केंद्र में आता है। यह न केवल विमर्श के रूप में सामने आता है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक गोलबंदी का कारण भी बनने लगता है। आम जनता को लगता है कि सत्ता और विकास में भागीदारी का यही एकमात्र माध्यम है। नतीजतन, भारत में विभिन्न सामाजिक अस्मिताओं के निर्माण और उनके आपसी संबंधों के निर्धारण में आरक्षण के विमर्श की भूमिका महत्वपूर्ण हो उठती है।

अगले आम चुनाव के पहले भी आरक्षण के इर्द-गिर्द गोलबंदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ‘जातीय गणना’ या जातिगत सर्वे के प्रश्न पर पक्ष-विपक्ष वर्ष भर पहले से गोलबंद होने लगा था। फिलहाल, महाराष्ट्र से लेकर मणिपुर तक आरक्षण और राज्य प्रायोजित विकास व अवसरों में भागीदारी को लेकर टकराव फिर से जन्म लेने लगे हैं। अस्मिताएं चाहे जातीय हों या सामुदायिक, उनको अनेक तरह से टकरावों के स्रोत के रूप में विकसित किया जाने लगा है।

परिप्रेक्ष्य होता यह है कि समाज में सीमांत पर बसे समुदाय का एक वर्ग जब अपने भीतर आकांक्षा की शक्ति विकसित कर लेता है, तब वह उस आकांक्षा को पाना चाहता है। कई बार इस प्रक्रिया में उसे आरक्षण ही एकमात्र रास्ता दिखता है। उसे लगता है कि मात्र इसी से उसका सशक्तीकरण हो सकता है। इस प्रक्रिया में इन सामाजिक समूहों में से कुछ अधिक लाभ प्राप्त कर लेते हैं एवं जनतांत्रिक नीतियों द्वारा सृजित अवसर सीमांत के सामाजिक समूहों तक पहुंच ही नहीं पाता। इसका एक कारण यह है कि सीमांत पर बसे समुदायों में से कई ऐसे हैं, जो अभी आरक्षण का लाभ लेने की स्थिति में ही नहीं आ पाए हैं। ऐसे में, कुछ ही समुदाय शक्ति और अवसरों का अधिग्रहण करने लगते हैं और अन्य ‘अदृश्य’ बनकर रह जाते हैं। आजादी के इतने वर्षों बाद भी उत्तर प्रदेश की कुल 66 अनुसूचित जातियों में से कुछ ही जनतंत्र के गलियारे में मुखर होकर शामिल हुई हैं। अभी भी चालीस-पैंतालीस से ज्यादा जातियां अदृश्य सी हैं। उनकी आबादी छोटी है, उनमें शिक्षा अभी उतनी नहीं फैल पाई है। जनतंत्र में अपनी भागीदारी का दरवाजा खटखटाने का सामर्थ्य अभी वे अपने भीतर विकसित नहीं कर पाई हैं।

यही स्थिति आपको बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी देखने को मिलेगी। वस्तुत, आरक्षण का लाभ लेने के लिए वह शक्ति विकसित करनी होती है, जिसके आधार पर हिस्सेदारी का दावा किया जा सके। यह शक्ति इन मुखर से दिखने वाले सामाजिक समूहों के एक खास तबके में ही दिखती है, जिन्हें ‘क्रीमीलेयर’, ‘आगे बढ़ आया परिवार’ आदि कहा जाता है। उनके पास ही आरक्षण का लाभ पहुंच पाता है, जिसके कारण समाज में आरक्षण के लाभ का समान एवं जनतांत्रिक वितरण नहीं हो पाता है।

‘आरक्षण’ के साथ दो पहलू और जुडे़ हैं। एक, इन सुरक्षात्मक भेद से सृजित अवसरों का समान बंटवारा, और दूसरा, अनेक उपेक्षित समूहों में आरक्षण का लाभ लेने की शक्ति, सामर्थ्य व स्थिति को बनाना। यह सुखद है कि इन दोनों दिशाओं में भारत की जनतांत्रिक सरकारें- केंद्र एवं राज्य, प्रयास कर रही हैं। उत्तर प्रदेश में जब राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने आरक्षण के लाभ के समान वितरण के लिए एक समिति बनाई थी। उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस चिंता का समाधान खोजने के लिए 2019 में ‘सामाजिक न्याय समिति’ का गठन किया था। केंद्र द्वारा बनाई गई रोहिणी समिति में भी इस पर विचार किया गया है। इसलिए आरक्षण के लाभ का सतत मूल्यांकन और उस आधार पर उसके समान वितरण का प्रयास तो होना ही चाहिए।

यूं भी भारत में आरक्षण की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। जातियों की श्रेणी के निर्धारण में कई राज्यों के अलग-अलग मानक हैं। आरक्षण के प्रश्न पर किसी भी राजनीतिक गोलबंदी के साथ इन प्रश्नों को भी सुलझाना होगा। दुनिया के सामाजिक इतिहास पर गौर करें, तो लगता है कि तीन बातें साथ-साथ हो रही होती हैं। पहली, एक साथ अनेक प्रकार की सीमांतताएं (मार्जिनलिटी) सक्रिय रहती हैं। दूसरी, हर जनतांत्रिक सरकार उनसे उबरने के लिए जद्दोजहद कर रही होती है और तीसरी, सीमांतीकरण से उबरने की लड़ाई में अनेक प्रकार की नई सीमांतताएं सृजित होती रहती हैं।

भारतीय जनतंत्र में भी ये प्रक्रियाएं साथ-साथ चल रही हैं। भारतीय जनतंत्र को भी एक समरस और समान समाज रचने के अपने प्रयास करते रहने होंगे। ऐसे समाज को रचने के लिए जरूरी है कि उर्ध्व समानता बनाने की जगह हम ‘क्षैतिज’ समानता रचें। हमें यह भी देखना होगा कि एक सीमांतता को खत्म करने की प्रक्रिया में हम कहीं नई सीमांतताएं तो नहीं खड़ी कर रहे। यह भी देखें कि गरीबी व पिछड़ापन जिस आरक्षण नीति का आधार रहा है, वह अन्य विकसित करार दिए गए सामाजिक समूहों में धीरे-धीरे पांव न पसारने लगे। इसके लिए भारतीय समाज में गरीबी का विस्तार रोकना होगा। संभवत इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘गरीब मुक्त भारत’ का एजेंडा प्रस्तुत किया। बेशक, भारतीय समाज में गरीबी की जातीय प्रकृति भी है, परंतु गरीबी जाति से परे भी सक्रिय रहती है। हमें आरक्षण के मुद्दे पर विचार करते समय जाति एवं गरीबी के संबंधों में हो रहे सतत परिवर्तनों का मूल्यांकन करते हुए आरक्षण से प्राप्त अवसरों के वितरण करने के नीति-नियमों पर चिंतन करना होगा। इसके साथ ही भारतीय समाज में जनतांत्रिक प्रयासों से विकसित हो रही ‘सामाजिक गतिशीलता’ पर अनवरत शोध एवं मूल्यांकन करना होगा और उसके निष्कर्षों को नीति-निर्माण में शामिल भी करना होगा।

हमें यह विचार करना होगा कि भारतीय समाज में गरीबी, असमानता के विरुद्ध संघर्ष और सामाजिक गतिशीलता के लिए आरक्षण के साथ और क्या माध्यम एवं रास्ते हो सकते हैं? अमेरिकी समाज में भी इस बाबत पुनर्विचार शुरू हो गया है, जबकि वह ‘सुरक्षात्मक भेद’ (प्रोटेक्टिव डिस्क्रिमिनेशन) की नीतियों का जनक रहा है। ऐसे में, भारतीय जनतांत्रिक राजनीति एवं विमर्श में भी हमें अनेक ऐसी बहसों को उठाना होगा। भले ही, प्रश्न उठाना कठिन होता है, परंतु सवाल पूछने से ही समाधान मिलता है। हां, उत्तर ऐसा जरूर हो, जो सबके प्रति संवेदनशील हो और सबको अपने में शामिल कर सके।


अपना राजकाज
 
अपना राजकाज
लखनऊ में मंगलवार को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा।
अपना राजकाज
अपना राजकाज
बंद या घाटे में चल रहे पर्यटक आवास गृह पीपीपी मोड में चलेंगे

लखनऊ पर्यटन विभाग के बंद पड़े या घाटे में चल रहे पर्यटक आवास गृह अब पीपीपी मोड पर विकसित व संचालित किए जाएंगे। वहीं अयोध्या के टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर का संचालन भी इसी तर्ज पर होगा। प्रदेश के 5 पर्यटक आवास गृहों को उच्चतम निविदाकर्ता को लीज पर देने और फर्म के साथ अनुबंध किए जाने के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि फर्रुखाबाद के संकिसा, बुलंदशहर के नरौरा, औरैया के देवकली, कानपुर के बिठूर के राही पर्यटक आवास गृहों और मथुरा स्थित गोकुल रेस्टोरेंट को पीपीपी मोड पर विकसित करने के लिए लीज पर दिया जा रहा है। इसके अलावा राही पर्यटक आवास गृह मुंशीगंज अमेठी, देवाशरीफ बाराबंकी, सोरों एटा, कान्धला शामली, खुर्जा बुलंदशहर, हरगांव सीतापुर और पटना पक्षी विहार एटा को भी लीज पर देने की तैयारी है।

सरकार 100 छोटे शहरों में सुविधाएं बढ़ाएगी

20 हजार से एक लाख की आबादी वाले निकाय आएंगे आकांक्षी नगर योजना के दायरे में, विकास पर सौ करोड़ खर्च किए जाएंगे

छह एजेंसियों के जरिए खरीदा जाएगा धान

लखनऊ। योगी सरकार ने नई धान खरीद नीति तय कर दी है। धान खरीद कम्प्यूटराइज्ड सत्यापित खतौनी आधार कार्ड के आधार पर की जाएगी। रेवेन्यू रिकार्ड के जरिए किसानों द्वारा बोए गए रकबे का सत्यापन होगा। किसानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। खाद्य विभाग, पीएसएफ, पीसीयू, मंडी परिषद, यूपीएसएस व भारतीय खाद्य निगम के जरिए धान खरीद होगी।

क्रेशर इकाइयों के लिए मण्डी शुल्क समाधान योजना

लखनऊ। कैबिनेट की बैठक में चीनी वर्ष 2022-23 के लिए गुड़-खाण्डसारी इकाइयों को राहत देते हुए मंडी शुल्क समाधान योजना लागू करने को मंजूरी दी है।

चीनी वर्ष 2021-22 में दो प्रतिशत मण्डी शुल्क और 0.5 प्रतिशत विकास सेस के आधार पर निर्धारित प्रशमन राशि के स्थान पर चीनी वर्ष 2022-23 में एक प्रतिशत मण्डी शुल्क और 0.5 प्रतिशत विकास सेस की व्यवस्था की है।

लखनऊ राज्य सरकार 20 हजार से एक लाख की आबादी वाले 100 छोटे शहरों को ‘आकांक्षी नगर योजना’ से सुविधायुक्त बनाने जा रही है। इनके विकास पर नगर विकास विभाग 100 करोड़ रुपये खर्च करेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ। इस योजना से इन शहरों में जरूरी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवस्था के क्षेत्रों में सुधार करते हुए कारोबार के नए रास्ते खोले जाएंगे, जिससे नए आर्थिक अवसर खुले और लोगों का पलायन रुके।

कैबिनेट फैसले के मुताबिक, योजना के दिशा-निर्देशों में भविष्य में जरूरत के आधार पर संशोधन करने के लिए नगर विकास मंत्री को अधिकृत किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह योजना इसमें मददगार साबित होगी। आकांक्षी नगर योजना का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में चल रही सरकारी योजनाओं को सुनियोजित शहरी विकास के लिए अच्छे ढंग से लागू करते हुए त्वरित प्रगति व सतत विकास कराना है।

योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।


पुलिस कर्मियों को 500 रुपये मोटरसाइकिल भत्ता लखनऊ में बनेगी ऊदादेवी महिला बटालियन

पुलिस कर्मियों को 500 रुपये मोटरसाइकिल भत्ता

उन्नाव में अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय

कैबिनेट ने उन्नाव में राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय की स्थापना को मंजूरी के साथ वहां आवासीय, अनावासीय भवनों के निर्माण कार्यों के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय की स्थापना 67 एकड़ जमीन पर होगी।

लखनऊ में वीरांगना ऊदादेवी महिला पुलिस बटालियन की स्थापना के लिए आवासीय, अनावासीय भवनों के निर्माण कार्यों की स्वीकृति से जुड़े प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र इस निर्णय को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके लिए 391.56 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति निर्गत किया जाना है। वहीं राजधानी में यूपी विशेष सुरक्षा बल मुख्यालय एवं पहली वाहिनी विशेष सुरक्षा बल की स्थापना के लिए आवासीय, अनावासीय भवनों के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने सहमति प्रदान कर दी है। इसके तहत 655.41 करोड़ रुपये स्वीकृति निर्गत किया जाना है।

गोरखपुर में विशेष सुरक्षा बल की द्वितीय वाहिनी

इसके अलावा गोरखपुर में यूपी विशेष सुरक्षा बल की 2वीं वाहिनी की स्थापना के लिए आवासीय, अनावासीय भवनों के निर्माण कार्यों की स्वीकृति के संबंध में प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत होने वाले निर्माण कार्यों पर 431.70 करोड़ रुपये लागत आने का अनुमान है।

अतिरिक्त 5 हजार करोड़ का प्राविधान

बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के गठन के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार की ओर से 5 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई थी और मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण व नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना मद के तहत ऋण के रूप में 5000 करोड़ का प्राविधान किया गया।

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक ने मंगलवार को पुलिस महकमे से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई। पुलिस कर्मियों के साइकिल भत्ते को मोटरसाइकिल भत्ते में तब्दील करते हुए इसे 300 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दिया गया है। इसी तरह गोरखपुर में विशेष सुरक्षा बल की वाहिनी, शामली में पीएसी की नई वाहिनी और संभल व औरैया में भी पुलिस के आवासीय व अनावासीय भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि यूपी पुलिस को अब साइकिल भत्ता 200 रुपये की जगह 500 रुपये मोटर साइकिल भत्ता दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश पुलिस के आरक्षी, मुख्य आरक्षी को दी जाने वाले साइकिल भत्ता को मोटर साइकिल भत्ते में परिवर्तित कर इसे 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़ा कर 500 रुपये प्रतिमाह अनुमन्य करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है।

वर्ष 2018 में जारी शासनादेश के अनुसार सभी विभागों में साइकिल भत्ते के लिए पात्र कर्मियों को 200 रुपये का प्रावधान किया गया था। पुलिस विभाग के आरक्षी या मुख्य आरक्षियों के लिए कम समय में घटनास्थल पर साइकिल से पहुंचना व्यवहारिक नहीं रह गया है। साथ ही कानून व्यवस्था को बनाये रखने के लिए साइकिल के स्थान पर मोटर साइकिल के प्रयोग तथा साइकिल के स्थान पर मोटर साइकिल भत्ता अनुमन्य करने को प्रासंगिक मानते हुए कैबिनेट ने सहमति प्रदान की है। भत्ते में वृद्धि करने से सरकार पर 6.78 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्ययभार आएगा।


खाने-पीने की चीजों के सूचकांक में भी गिरावट देखने को मिली जुलाई के मुकाबले अगस्त में खुदरा महंगाई नरम पड़ी

जुलाई के मुकाबले अगस्त में खुदरा महंगाई नरम पड़ी
जुलाई के मुकाबले अगस्त में खुदरा महंगाई नरम पड़ी
जुलाई के मुकाबले अगस्त में खुदरा महंगाई नरम पड़ी
राज्यवार महंगाई के आंकड़े

राज्य महंगाई दर ()

आंध्र प्रदेश 7.78

हरियाणा 8.27

गुजरात 6.88

हिमाचल 7.01

झारखंड 7.91

कर्नाटक 7.85

उड़ीसा 8.23

पंजाब 7.34

राजस्थान 8.60

तमिलनाडु 7.76

तेलंगाना 8.27

उत्तर प्रदेश 7.20

उत्तराखंड 7.84

दिल्ली 3.09

आगे चलकर और राहत मिलने की उम्मीद

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्रत्त्ी अदिति नायर के मुताबिक सब्जियों की महंगाई जुलाई में 37 फीसदी से घटकर अगस्त में 26 फीसदी पर आ गई है। इसका कुल महंगाई के आंकड़ों पर असर देखने को मिला है। साथ ही कपड़ों के अलावा हाउसिंग और अन्य वस्तुओं की महंगाई भी नरम पड़ी है। फिलहाल टमाटर के दामों में कमी देखने को मिली है। हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई में प्याज और दालों के ऊंचे दामों का असर दिखाई दे सकता है।

नई दिल्ली अगस्त महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक महंगाई 6.83 फीसदी पर आ गई है। पिछले महीने जुलाई में ये 7.44 फीसदी थी। एक साल पहले अगस्त 2022 में सात फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों के सूचकांक में भी गिरावट देखने को मिली है। ये पिछले महीने के 11.51 फीसदी के मुकाबले अगस्त 2023 में 9.94 फीसदी पर रहा।

आकंड़ों के अनुसार, आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में सब्जियों की महंगाई आसमान पर पहुंच गई थी, जो अगस्त के महीने में 5.9 फीसदी की गिरावट के साथ 26.14 फीसदी पर आ गई है, जो जुलाई में 37.34 फीसदी पर थी। इसी तरह तेल और वसा उत्पादों की कीमतें घटकर 15.28 प्रतिशत रह गईं। अगस्त में ग्रामीण महंगाई 7.02 फीसदी पर आ गई है, जो जुलाई में 7.63 फीसदी पर थी। जबकि शहरी में महंगाई महीने दर महीने 7.02 फीसदी से घटकर 6.59 फीसदी पर आ गई है।


यूपीआई से गलत खाते में गई रकम इस तरह वापस मिलेग

 

नई दिल्ली कभी-कभार यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई से भुगतान करते समय नंबर गलत डल जाता है या जल्दीबाजी में गलत कोड स्कैन कर लेते हैं जिससे पैसा किसी गलत खाते में चला जाता है। जानकारी के अभाव में इस रकम को वापस पाना मुश्किल हो जाता है। यह जानना आपके लिए फायदेमंद है कि गलत खाते में भेजी गई ऐसी रकम को वापस हासिल किया जा सकता है। यह तरीका काफी आसान है।

ऑनलाइन पैसा भेजने से पहले जानकारियां अवश्य जांच लें सबसे पहले, यदि आपने भूलवश गलत यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर पर पैसे भेज दिए हैं, तो पैसा पाने वाले से इसे वापस करने का अनुरोध कर सकते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक बार लेनदेन सफल हो जाने के बाद, इससे पैसे वापस नहीं लिए जा सकते। इसलिए, किसी भी परेशानी से बचने के लिए यूपीआई लेनदेन करने से पहले भरी गई जानकारी की दोबारा चेक कर लें।

पैसा कब वापस आएगा अगर भुगतान किसी गलत नंबर वाले खाते में होता है तब आपको तुरंत पैसे वापस मिल जाएंगे। लेकिन अगर आपने किसी वेरिफाइड अकाउंट में पैसे भेजे हैं तब ये उस व्यक्ति पर निर्भर करता है। अगर खाताधारक ने को मंजूरी दे दी है, तब जल्द रिफ

No comments: