प्रधानमंत्री बोले- पूरी दुनिया के लिए एक नियम आधारित व्यवस्था जरूरी

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में गुरुवार को पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान (बाएं से दाएं) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम। ● एजेंसी


जकार्ता, एजेंसियां news प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में आयोजित दो कार्यक्रमों के मंच से चीन को घेरा। आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कोविड महामारी के बाद पूरी दुनिया के लिए एक नियम आधारित व्यवस्था बनाने का आह्वान भी किया।
आसियान-भारत शिखर सम्मेलन को गुरुवार को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रगति और ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करना सभी के हित में है। वहीं, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशों से अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रयास करने को कहा।
मोदी ने कहा कि दक्षिण चीन सागर के लिए आचार संहिता प्रभावी होनी चाहिए। यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप होनी चाहिए। इसमें उन देशों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए जो चर्चा का हिस्सा नहीं हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी है। यह हमारी सदी है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद नियम आधारित विश्व व्यवस्था का निर्माण करने और मानव कल्याण के लिए सभी के प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति का केंद्रीय स्तंभ है। यह आसियान की केंद्रीयता और हिंद-प्रशांत पर उसके दृष्टिकोण का पूरी तरह से समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास, भूगोल भारत और आसियान को जोड़ता है। साझा मूल्यों के साथ-साथ क्षेत्रीय एकता, शांति, समृद्धि और बहुध्रुवीय दुनिया में साझा विश्वास हमें एक साथ बांधता है। उन्होंने कहा कि समूह भारत की हिंद-प्रशांत पहल में प्रमुख स्थान रखता है।
आसियान में सुनी जाती है सभी की आवाज मोदी ने अपने संबोधन में कहा, आसियान मायने रखता है, क्योंकि यहां हर किसी की आवाज सुनी जाती है।आसियान विकास का केंद्र है, क्योंकि आसियान क्षेत्र वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बेरोकटोक वैध व्यापार हो प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों की हिंद-प्रशांत में शांति, सुरक्षा और समृद्धि में रुचि है। उन्होंने कहा, समय की मांग ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू हो।
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