Monday, September 4, 2023

वेदों में मौजूद है विज्ञान की बुनियाद

 वेदों में मौजूद है विज्ञान की बुनियाद

 
वेदों में मौजूद है विज्ञान की बुनियाद

News today इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ ने आखिर ऐसा क्या कह दिया कि देश में हलचल मच गई? यही न कि अंतरिक्ष विज्ञान का सिद्धांत वेदों से मिलता है। मगर एक विशिष्ट सोच और विचारधारा के लोगों को यह बयान रास नहीं आ रहा है। सच्चाई यह है कि ऐसे लोग न विज्ञान को पूरी तरह जान रहे हैं और न ही वेद को। पाश्चात्य जगत की उत्पत्ति और सभ्यता 4,000 वर्षों में सिमटकर रह गई है और वे इसके बाहर न तो सोच सकते हैं, और न दूसरों को सोचने देते हैैं। मगर एक बात स्पष्ट होनी चाहिए कि वेदों में जो विज्ञान है, वह रासायनिक, भौतिक सभी विषयों पर है और वेद विज्ञान के अलावा कुछ नहीं। कोई इसे इतिहास या धार्मिक पूजा-पाठ, कर्मकांड का ग्रंथ मानता है, तो भूल करता है। वेदों के मंत्रों को सहज समझाने के लिए कथाएं रची गईं, जिनका तालमेल इतिहास से कर दिया गया, जैसे सामवेद में 257 संख्या की ऋचा में कहा गया है, प्र व इन्द्राय बृहते मरुतो ब्रह्मार्चत। वृत्रं हनति वृत्रहा शतक्रतुर्वज्रेण शतपर्वणा॥ (वृत्र मेघ को भी कहते हैं) तो इंद्ररूपी ऋतुसंहारक मरुत से कहते हैं कि आप आकर मेघों का संहार करके जलवृष्टि करें। अब यह एक वैज्ञानिकतथ्य है कि जब मेघ (बादल) नभ को अंधकारमय कर देते हैं, तब मरुत (वायु) की सहायता से वृष्टि होती है और गगन एक बार फिर प्रकाशवान होता है।

एक बात और, वैदिक सूत्र विज्ञान के सूत्र देते हैैं, न कि विस्तृत क्रिया और गुणनफल के। जैसे, ऋग्वेद 3.29.2 कहता है, अरण्यो निहितो जातवेदा (ऋ.3.29.2), यानी दो लकड़ियों को रगड़कर अग्नि का आविष्कार किया जाता है। यह निर्देश है। इसको विस्तार देकर हमें जानना होगा कि इसकी विधि क्या है, कितनी ऊर्जा या अग्नि उत्पन्न होगी? यह गुणनफल आधुनिक विज्ञान ने किया। यही बात विमान के बारे में है, जबकि वेदों से संकेत लेकर बाद में वृहद विमान-शास्त्र भी लिखा गया, और वह भी आधुनिक वैज्ञानिकों से पहले का है। ऋग्वेद में कहा गया है, सूरादश्वं वसवो निरतष्ट (ऋ.1.163.2) अर्थात, वैज्ञानिकों ने सूर्य से अश्व-शक्ति व सौर-ऊर्जा निकाला। अग्निषोमौ बिभ्रति आप इत् ता (अथर्ववेद.3.13.5) अर्थात जल के अंदर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन विद्यमान है। हम बेशक कह दें कि सौर ऊर्जा तो हमारी देन है, लेकिन वेदों में यह उल्लेखित है कि सूर्य में ऊर्जा होती है। साफ है, पाश्चात्य जगत के विज्ञान की खोज में भारतीय वेदों का बहुत बड़ा हाथ है, जिसके सूक्तों को डिकोड करके कल्पना अर्जित की गई और बाद में वहां के वैज्ञानिकों ने वह आविष्कार विश्व को दिया।

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