तस्करी रोकने के उपाय और जांच में इंटरपोल की मदद, पिछले कुछ वर्षों में विदशों से 251 धरोहर व मूर्तियां वापस लाई गईं

नई दिल्ली, Raju bhai news blogger जी-20 शिखर सम्मेलन में सांस्कृति संपत्ति की अवैध तस्करी को रोकने पर चर्चा होने की संभावना है। इसको रोकने के लिए जी-20 के सदस्य देश आपसी सहयोग बढाने पर बातचीत करेंगे। इसके साथ तस्करी रोकने के उपायों, डाटाबेस बनाने और बेहतर तालमेल, अंतरराष्ट्रीय जांच व अभियोजन के लिए इंटरपोल की मदद लेने पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा होनी की उम्मीद है।
कई दौर की बैठक के बाद जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए तैयार किए गए काशी संस्कृति मार्ग (कल्चर पाथवे) में सांस्कृतिक संपत्ति की अवैध तस्करी पर विस्तार से चर्चा की गई है। जी-20 देशों के सांस्कृतिक मंत्रियों की मंजूरी के बाद बनाए गए इस दस्तावेज में अवैध तस्करी से निपटने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया है। उम्मीद जताई गई है कि इससे तस्करी रोकने में मदद मिलेगी।
दिशा- निर्देशों को लेकर भी मंथन जी-20 सम्मेलन में सांस्कृतिक संपत्ति की तस्करी रोकने के लिए अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण, जागरूकता बढ़ाना और सहयोग बढ़ाने चर्चा होने की उम्मीद है। इसमें इंटरऑपरेबल डिजिटल टूल और विशेष सांस्कृतिक पेशेवरों, न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन की क्षमता निर्माण करना भी शामिल है। इसके साथ ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे।
अमेरिका ने लौटाईं प्रचीन चीजें इस दिशा में अमेरिका पहले ही पहल कर चुका है। अमेरिकी सरकार ने भारत को सौ से ज्यादा पुरानी चीजे और मूर्तियां लौटाने का फैसला किया है, जो कभी तस्करी के जरिए लाई गई थी। जून में अमेरिकी दौरे के दौरान वॉशिंगटन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उल्लेख किया था। इसके साथ कई अन्य देशों से भी मूर्तियां वापस लाई गई हैं।
वापस लौटी सांस्कृतिक धरोहर पिछले कुछ वर्षों में 251 सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाया गया है। इनमें वाराणसी की अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति, राजस्थान से चितौड़गढ़ की नटराज की मूर्ति, चोल काल की श्रीदेवी की मूर्ति, राम लक्ष्मण और सीता की अष्टधातु की मूर्तियां, भगवान बुद्ध की कई प्रतिमाएं आदि शामिल हैं। ज्यादातर सांस्कृतिक धरोहर व मूर्तियां ज्यादातर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया से लाई गई हैं।
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