अगस्त में चंद्रयान-3 और सितंबर में आदित्य एल1 की सफल लॉन्चिंग के बाद अब गगनयान मिशन लॉन्च होगा
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इसरो ने शनिवार को देश के पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल1’ का श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया।




नई दिल्ली, news भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अगस्त में चंद्रयान-3 और सितंबर में आदित्य मिशन की सफल लॉन्चिंग के बाद अब अक्तूबर में एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। मध्य अक्तूबर में इसरो का बहुप्रतीक्षित गगनयान मिशन लॉन्च होगा। लगातार तीसरे महीने इसरो की यह तीसरी बड़ी और सफल लॉन्चिंग होगी।
चंद्रयान-3 की तरह गगनयान मिशन में भी विलंब हुआ है। लेकिन अब मिशन की तीन में से पहली उड़ान की तैयारी तकरीबन पूरी हो चुकी है। इसरो सूत्रों के अनुसार, गगनयान की पहली उड़ान की तिथि जल्द घोषित की जाएगी।
गगनयान को अंतरिक्ष की निचली कक्षा में भेजा जाना है जो धरती से करीब 400 किमी की ऊंचाई पर होगा। इसके तहत पहले चरण में एक खाली यान को भेजा जाएगा। अक्तूबर में उड़ने वाला गगनयान तीन दिनों तक अंतरिक्ष का चक्कर लगाएगा। इसके दूसरे चरण में गगनयान में रोबोट भेजे जाएंगे। दूसरी उड़ान 2024 की शुरुआत में होगी। लेकिन यह गगनयान की पहली उड़ान की सफलता पर भी निर्भर करेगा। जबकि तीसरी उड़ान जो अप्रैल 2024 तक प्रस्तावित है, उसमें तीन अंतरिक्ष यात्री भी सवार होंगे। लेकिन तीसरी उड़ान भी पहली और दूसरी उड़ान की सफलता पर निर्भर करेगी। यदि पहली दोनों उड़ानें सफल रहती हैं तो फिर अप्रैल तक भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने में भी सफल हो जाएगा।
अंतरिक्ष यात्रियों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्रियों का चयन पहले ही हो चुका है तथा रूस में उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। इसके अलावा इसरो ने इसके लिए यान भी तैयार कर लिया है। साथ ही अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर उतारने के लिए अलग से कैप्सूल भी बनाया जा चुका है।
अमेरिका नासा लगातार जुटा हुआ है अध्ययन में
● अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने अगस्त 2018 में पार्कर सोलर प्रोब प्रक्षेपित की। दिसंबर 2021 में पार्कर ने सूर्य के ऊपरी वायुमंडल कोरोना से उड़ान भरी और वहां कणों व चुंबकीय क्षेत्रों की जानकारी लेने की कोशिश की। नासा के अनुसार, यह पहली बार था कि किसी यान ने सूर्य से संबंधित पहलुओं का अध्ययन किया।
● नासा ने फरवरी 2020 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के साथ हाथ मिलाया और डेटा एकत्र करने के लिए सोलर ऑर्बिटर का प्रक्षेपण किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सूर्य ने पूरे सौर मंडल में लगातार बदलते अंतरिक्ष वातावरण को कैसे निर्मित और नियंत्रित किया।
● नासा की ओर से अन्य सक्रिय सौर मिशन में अगस्त, 1997 में प्रक्षेपित एडवांस्ड कंपोज़िशन एक्सप्लोरर, अक्तूबर, 2006 में प्रक्षेपित सोलर टेरेस्ट्रियल रिलेशन्स ऑर्ब्जवेट्री; फरवरी, 2010 में प्रक्षेपित सोलर डायनेमिक्स वेधशाला; और जून 2013 में प्रक्षेपित इंटर×फेस रीजन इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ शामिल हैं।
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