Sunday, September 3, 2023

खादर में गंगा का रौद्र रूप शांत, अब दिख रहे बर्बादी के निशां

 खादर में गंगा का रौद्र रूप शांत, अब दिख रहे बर्बादी के निशां

 
खादर में गंगा का रौद्र रूप शांत, अब दिख रहे बर्बादी के निशां
खादर में कुछ इस तरह से लोगों को नदी पार करनी पड़ रही है। ● हिन्दुस्तान
खादर में गंगा का रौद्र रूप शांत, अब दिख रहे बर्बादी के निशां
खेतों में भरा पानी। ● हिन्दुस्तान

पानी व टैज्ैक्टर से गुजर रहे है लोग

चांदपुर मार्ग पर भीकुंड गांव के समीप क्षतिग्रस्त अप्रोच रोड से भी लोगो ने निकलना प्रारंभ कर दिया हालाकि अब भी लगभग दो फीट पानी उससे होकर बह रहा है। परंतु चांदपुर की ओर सरकारी डयूटी पर जाने वाले अध्यापक, पंचायतकर्मी आदि लोग उसी पानी से होकर गुजर रहे है। वही दो टैज्क्टर टाज्ली मे बाइक लादकर टूटी अप्रोच रोड का पार कर रहे है। चांदपुर की ओर जा रहे लोगो ने बताया कि बाइक को उतारने के सौ रूपये वसूले जा रहे है परंतु बिजनौर से घूम कर आने के बजाए समय कम लगता है।

पनपेगी बीमारियां

बस्तियो मे घरो के नजदीक पानी रूकने के कारण उसमे दुर्गंध होने लगी है। कई स्थानो पर पानी व गंदगी इतनी पसरी हुई कि वहा पर रहने वाले लोगो मे संक्रामक बीमारियां फैल सकती है।

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आज की ताजा खबर हस्तिनापुर, गंगा नदी ने अपना रौद्र रूप तो शांत कर लिया और अपनी मुख्य धारा मे चली गयी। परंतु डेढ माह की विभिषिका के पश्चात खादर क्षेत्र की हजारो हैक्टेअर भूमि पर खडी फसल को लील गयी। खादर क्षेत्र के लोगो से उनकी जितनी पीडा सुने तो कम हैै।

लगभग डेढ माह बाद गंगा नदी अपनी मुख्य धारा मे तो लौट गयी। परंतु जिधर से भी निकली उधर ही बर्बादी का मंजर छोडती चली गयी। फसले नष्ट हो गयी, सडके टूट गयी, मकान क्षतिग्रस्त हो गये। अब नही लगता कि वे इस बरस की बाढ की विभिषिका से कई बरसो तक उबर पायेंगे। हस्तिनापुर रामराज मार्ग पर भीकुंड तिराहे के समीप सडक की हालत ऐसी कर दी है कि कई जगह तो ऐसा लगता है कि यहां पर सडक ही नही थी। वही रठोरा कला, सिरजेपुर मार्ग व फतेहपुर प्रेम जाने वाले संपर्क मार्ग की स्थिति अत्यन्त ही खराब है। वहा से होकर गुजरना जोखिम भरा है।

खेतो मे भरी सिल्ट बाढ के पानी के साथ बह कर आई सिल्ट भी खेतो मे भर गयी हैं। कई खेतो मे तो खडे गन्ने की फसल भी कई कई फीट तक सिल्ट मे दब गयी है। वही गन्ने मे खेतो मे जलकुंभी भी भर गयी है। जिससे गन्ने की फसल नीचे दब कर नष्ट हो गयी है।

चारा सूख कर हो गया नष्ट खेतो मे खडा चारा भी पानी भरा रहने के चलते सूख गया है। जो पशुओ के खिलाने के लायक नही रह गया हैं। जिससे पशुपालको के समक्ष चारे का गंभीर संकट है।

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