Saturday, September 30, 2023

अबीर गुलाल उड़ा गणपति बप्पा को किया विदा

 
अबीर गुलाल उड़ा गणपति बप्पा को किया विदा
हस्तिनापुर में गणपति बप्पा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते श्रद्धालु।

हस्तिनापुर, कस्बे के रामलीला मैदान पर पिछले दस दिनों से गणेश पूजा महोत्सव का शुक्रवार को मूर्ति विसर्जन के साथ समापन हो गया।

कस्बे के रामलीला मैदान में चल रहे सर्वसिद्धिदायक श्री गणेश चतुर्थी मेला महोत्सव का महाआरती कर समापन किया गया। शोभायात्रा में शामिल झांकियां सभी का मन मोह रही थी। शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। यात्रा देखने वाले भी श्रद्धालुओं के साथ भजनों पर अबीर गुलाल लगाते हुए झूमे। गणपति बप्पा को मध्य गंग नहर में विसर्जित कर दिया गया। इस मौके पर शांतिकुंज हरिद्वार की प्रचार टोली के सतीश चंद मौर्य, रोहिणी उपाध्याय, रणधीर उपाध्याय, ओमबीर भड़ाना, पंकज, जितेश कुमार, दीपक, विष्णु, नीरज, अनीता उपाध्याय, शुभम आदि रहे।


खेत में दवा का छिड़काव कर रहे किसान की तबीयत बिगड़ी, मौत

 
खेत में दवा का छिड़काव कर रहे किसान की तबीयत बिगड़ी, मौत
खेत में दवा का छिड़काव कर रहे किसान की तबीयत बिगड़ी, मौत

मेरठ रोहटा थाना क्षेत्र के गांव डूंगर निवासी एक किसान की शुक्रवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। बताया गया है कि शुक्रवार सुबह वह अपने ईख के खेतों में दवाई डाल रहा था तभी अचानक खेत पर ही वह बेहोश होकर गिर गया। लोगों ने उसे रोहटा सीएचसी में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

गांव डूंगर निवासी चंद्रवीर (50) मेरठ में होमगार्ड थे। चंद्रवीर नौकरी के साथ खेती भी संभालते थे। गुरुवार शाम चंद्रवीर सिंह ड्यूटी कर घर आए थे। बताया गया है कि शुक्रवार सुबह वह अपने खेतों में दवाई डालने गए थे। दवाई के असर से चंद्रवीर बेहोश हो गए। किसानों व परिजनों ने चंद्रवीर सिंह को रोहटा सीएचसी में भर्ती कराया। जहां मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने किसान चंद्रवीर के परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की।



Friday, September 29, 2023

खबर 29/09/2023

स्वामीनाथन ने अनाज संकट दूर किया


स्वामीनाथन ने अनाज संकट दूर किया

भारत को कृषि आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाले महान वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है। 1943 में बंगाल में भीषण अकाल देखकर उन्होंने खाद्यान्न की कमी को दूर करने के उद्देश्य से कृषि की पढ़ाई की। उन्होंने किसानों और सरकारी नीतियों के साथ-साथ अन्य वैज्ञानिकों की मदद से देश का अनाज संकट दूर किया।


कई पदों पर सेवाएं दीं 29/09/2023 

कई पदों पर सेवाएं दीं
एक कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन। उनका जन्म तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के कुंभकोणम में एक सर्जन डॉ. एमके संबासिवन और पार्वती थंगम्मल के घर हुआ था। ● फाइल फोटो
कई पदों पर सेवाएं दीं
कई पदों पर सेवाएं दीं
कई पदों पर सेवाएं दीं

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स्वामीनाथन ने अपने पीछे एक समृद्ध विरासत छोड़ी है जो दुनिया को मानवता के लिए एक सुरक्षित और भूख-मुक्त भविष्य की ओर ले जाने में मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी।

-द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति

कृषि क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान ने लाखों लोगों के जीवन को बदला। क्रांतिकारी योगदान से इतर, स्वामीनाथन नवाचार के ‘पावरहाउस’ और कई लोगों के लिए एक कुशल संरक्षक थे। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

स्वामीनाथन भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक (1961-1972), आईसीआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव (1972-79) और कृषि मंत्रालय के प्रधान सचिव (1979-80) रहे। वह कृषि मंत्रालय में प्रधान सचिव (1979-80), योजना आयोग (1980-82) में कार्यवाहक उपाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने फिलीपींस के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में महानिदेशक (1982-88) पद पर अपनी सेवाएं दीं।

कई पुरस्कार से सम्मानित

स्वामीनाथन को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री (1967), पद्मभूषण (1972), पद्मविभूषण (1989), रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (1971), विश्व खाद्य पुरस्कार (1987) और बोरलॉग पुरस्कार महत्वपूर्ण हैं। वह 1974 में रोम में संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कांग्रेस सहित कई सम्मेलनों के अध्यक्ष बने।

अंतिम संस्कार 30 को होगा होगा

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को कहा कि कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का अंतिम संस्कार पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के एक प्रवक्ता के मुताबिक प्रख्यात वैज्ञानिक का अंतिम संस्कार यहां 30 सितंबर को होगा।

वामीनाथन ने 1943 में बंगाल में भीषण अकाल में भूख के कारण लाखों लोगों की मौत देखी और दुनिया से भूख मिटाने के लिए कृषि की पढ़ाई करने का निश्चय किया। उन्होंने दो स्नातक डिग्रियां हासिल कीं, जिनमें से एक कृषि महाविद्यालय, कोयंबटूर से थी।

1947 में वह अनुवांशिकी और पादप प्रजनन की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) आ गए। उन्होंने 1949 में साइटोजेनेटिक्स में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।

नोबेल विजेता बोरलॉग संग किया काम स्वामीनाथन उच्च उपज देने वाली गेहूं की किस्मों को विकसित करने पर प्रसिद्ध अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक और 1970 के नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग के साथ मिलकर काम किया।

गेहूं-चावल की फसल को बढ़ावा दिया स्वामीनाथन को 1960 के दशक के दौरान भारत में उच्च उपज देने वाली गेहूं और चावल की किस्मों के विकास और शुरुआत का नेतृत्व करने के लिए विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उस वक्त देश अकाल की आशंका से ग्रस्त था। विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन के अनुसार कुछ ही वर्षों में गेहूं का उत्पादन दोगुना हो गया।

जब नोबेल विजेता ने माना स्वामीनाथन की प्रतिभा का लोहा स्वामीनाथन ने 60 के दशक में नोबेल विजेता नॉर्मन बोरलॉग को नव विकसित मैक्सिकन प्रजाति के बीज भेजने के लिए पत्र लिखा था। बोरलॉग भारत की परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद ही बीज भेजने के लिए सहमत हुए। बोरलॉग मार्च 1963 में यहां आए। उत्तर भारत के प्रमुख गेहूं उगाने वाले क्षेत्रों का दौरा करने के बाद उन्होंने अक्टूबर 1963 में चार किस्मों के लगभग 100 किलोग्राम बीज भेजे। इन्हें 1963-64 में पंतनगर, कानपुर, लुधियाना और पूसा में परीक्षण क्षेत्रों में बोया गया।

नवंबर 1964 में दिल्ली के जौंती गांव के किसानों ने दो किस्म का गेहूं बोया। उनमें अधिकांश ने चार टन और कुछ ने 4.5 टन प्रति हेक्टेयर फसल प्राप्त की। तब बोरलॉग ने स्वीकार किया था, गेहूं की कम ऊंचाई के पौधों को सबसे पहले पहचानने का बड़ा श्रेय स्वामीनाथन को जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो एशिया में हरित क्रांति नहीं होती।

हरित क्रांति के केंद्र बिंदु बने आजादी के बाद वर्ष 1967 तक सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्रों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया लेकिन देश की जनसंख्या वृद्धि खाद्य उत्पादन की तुलना में बेहद तेज गति से बढ़ रही थी। इसका नतीजा हरित क्रांति के रूप में सामने आया। एमएस स्वामीनाथन ने भारत में इसका नेतृत्व किया।1960 में उन्होंने उच्च उपज देने वाली किस्मों गेहूं के बीज तैयार करने के लिए नॉर्मन बोरलॉग और अन्य वैज्ञानिकों के साथ काम किया। स्वामीनाथन ने छोटे पैमाने के किसानों को यह सिखाने के लिए 1965 में देश के उत्तरी हिस्से में सैकड़ों प्रदर्शनियों का आयोजन किया कि कैसे जेनेटिक रूप से विकसित फसलों से कम भूमि में उच्च उपज मिल सकती है। इन कोशिशों से हरित क्रांति के पहले वर्ष में फसल का उत्पादन तीन गुना हो गया।


















गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया गया, जगह-जगह कार्यक्रमों में उमड़े श्रद्धालु, विसर्जन यात्रा में खूब झूमे श्रद्धालुगणपति बप्पा को 121 किलो लड्डू का भोग लगाया
 
गणपति बप्पा को 121 किलो लड्डू का भोग लगाया
सरधना में गणेश मूर्ति को नहर में विसर्जित करता सुक्का। 

गणपति बप्पा को 121 किलो लड्डू का भोग लगाया
श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। 
सुक्का, इलयास व फुरकान ने गणेश प्रतिमा विसर्जन कर दिया सौहार्द्र का संदेश

सरधना, सरधना गंगनहर पुल पर पिछले तीन दिनों से गणेश मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम चल रहा है। दो पुलिसकर्मी व लगभग चार गोताखोरों की टीम वहां तैनात है। गोताखोरों की टीम मंढियाई गांव के रहने वाले सुक्का की है। उसकी टीम में मेरठ निवासी इलयास, फुरकान व सोनू शामिल हैं। जोकि सुबह से शाम तक गंगनहर में गणेश मूर्तियों का विसर्जन कराकर साम्प्रदायिक सौहार्द्र का संदेश दे रहे हैं। सुक्का ने बताया कि वह हमेशा इस तरह के कायों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेता है। उसपर तैराकी का हुनर है। जिसका वह आपसी भाईचारा कायम करने के लिए इस्तेमाल करता है।

हस्तिनापुर, कस्बे के रामलीला मैदान में चल रहे श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव में अंतिम दिन सर्वसिद्धिदायक गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की गई। गुरुवार को श्रद्धालुओं ने 121 किलो के लड्डू का भोग लगाया।

श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव में श्रद्धालु गणपति बप्पा का दर्शन कर पूजा अर्चना कर रहे हैं। शांतिकुंज गायत्री परिवार के प्रचारक सतीश चंद ने गणेश चतुर्थी के बारे में विस्तार से बताया। श्रद्धालुओं ने 121 किलो लड्डू का भोग लगाया। शाम को गणपति बप्पा की सामूहिक आरती की। जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम संयोजक रणधीर उपाध्याय ने बताया कि शुक्रवार को गणपति बप्पा की शोभायात्रा निकाल विसर्जन किया जाएगा।

गणपति उत्सव से लगी रही भीड़ रोहटा। भगवान गणेशजी जी मूर्ति के विसर्जन को भोला झाल पर दिनभर तांता लगा रहा। रोहटा गांव में शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पूरे गांव में झांकी निकाली गई। उसके बाद भोला झाल पर गंग नहर में गणेश मूर्ति की विसर्जन कराया गया।

बैंड बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा



आईआरसीटीसी ने जारी कर दिया नया टाइम टेबल, शुरू कर दी बुकिंग, अब मेरठ स्टेशन पर पांच मिनट ही रहेगा स्टापेजयात्रीगण नया समय नोट करें नौचंदी शाम 4.40 बजे चलेगी

 
यात्रीगण नया समय नोट करें नौचंदी शाम 4.40 बजे चलेगी
यात्रीगण नया समय नोट करें नौचंदी शाम 4.40 बजे चलेगी
यात्रीगण नया समय नोट करें नौचंदी शाम 4.40 बजे चलेगी
यात्रीगण नया समय नोट करें नौचंदी शाम 4.40 बजे चलेगी

बजे मेरठ सिटी पहुंचने का समय

4.35

बजे दोपहर सहारनपुर से प्रस्थान

2.15

नौचंदी कब मिली, कब गई

● 1984 में हाईकोर्ट बेंच आंदोलन के मद्देनजर इस ट्रेन को प्रयागराज चलाया गया था

● उस वक्त केंद्रीय रेल मंत्री मोहसिना किदवाई थीं। उन्होंने यह घोषणा की थी

● तब खरखौदा का स्टापेज भी दिया गया। उस वक्त राजेंद्र शर्मा यहां से विधायक थे

● बाद में कारी रशीद मसूद की मांग पर एक लिंक एक्सप्रेस सहारनपुर को दिया गया

● कई बार सहारनपुर में लिंक एक्सप्रेस खड़ी रही तो मेरठ में यह लेट होती रही

● मेरठ से लखनऊ और इलाहाबाद जाने का केवल एक ही माध्यम थी यह रेल

● बरसों से इसका समय 7.55 बजे शाम को चलकर सवेरे 5.10 बजे पहुंचती है

वार्ता हुई है, उम्मीद बाकी है

मैनें रेल मंत्री को पत्र लिखकर और रेलवे के उच्चाधिकारियों से वार्ता की है। अभी दो दिन का समय है। उम्मीद बाकी है। एक प्रयास फिर करुंगा

राजेन्द्र अग्रवाल, सांसद।

मेरठ से सहारनपुर गई नौचंदी ट्रेन

जो ट्रेन कभी सहारनपुर के लिए लिंक थी, वह अब मुख्य ट्रेन हो गई है। 23 बोगियों वाली यह ट्रेन अब सहारनपुर से दोपहर 2.15 बजे चलेगी और मेरठ शाम 4.35 बजे आएगी। सिर्फ पांच मिनट का स्टापेज मेरठ रहेगा जबकि हापुड़ में यह ट्रेन 10 मिनट रखा गया है।

क्षमा करें, नौचंदी का समय नहीं बदलवा सके माननीय

वैसे मेरठ के सभी जनप्रतिनिधियों, माननीय सांसद, राज्यसभा सांसद, मंत्री और विधायक का प्रयास भी सफल होता नहीं दिख रहा है। सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने तो इस मामले में सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा। रेल अधिकारियों से वार्ता की। राज्यसभा सांसद डा.लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी उत्तर रेलवे के जीएम से वार्ता की। आश्वासन मिला कि वर्तमान समय के आसपास ही संचालन होगा। सभी ने एक अक्तूबर से प्रस्तावित टाइम टेबल को अनुपयुक्त बताया। इसके बावजूद आईआरसीटीसी की ओर से नई टाइम टेबल के अनुसार ही बुकिंग शुरू कर दी। ऐसा लगता है कि माननीयों का प्रयास सफल होता नहीं दिख रहा। वैसे दो दिन का समय अभी शेष है। यदि उच्च स्तर से कोई आदेश हुआ तो समय बदल सकता है।

आईआरसीटीसी के अनुसार नया टाइम टेबल

स्टेशन आगमन प्रस्थान

सहारनपुर - 14. 15

देवबंद 14.43 14.45

मुजफ्फरनगर 15.00 15.05

खतौली 15.24 15.26

मेरठ कैंट 15.48 15.50

मेरठ सिटी 16.35 16.40

हापुड़ 17.20 17.30

मुरादाबाद 19.49 19.54

बरेली 21.15 21.17

हरदोई 23.09 23.11

लखनऊ 01. 45 01.55

प्रयागराज 6.30

मेरठ, मेरठ से चलने वाली नौचंदी एक्सप्रेस एक अक्तूबर से 23 डिब्बों की पूरी ट्रेन सहारनपुर से चलेगी। आईआरसीटीसी ने गुरुवार को इसका नया टाइम टेबल जारी कर बुकिंग शुरू कर दी। अब मेरठ से यह ट्रेन दोपहर बाद 4.40 बजे चलेगी। मेरठ में नौचंदी का स्टापेज भी मात्र पांच मिनट का ही रहेगा। ऐसे में अब यात्रियों को यह विशेष तौर से नोट करना होगा।

आईआरसीटीसी की ओर से जारी नए टाइम टेबल के अनुसार एक अक्तूबर से नौचंदी एक्सप्रेस सहारपुर से दोपहर 2.15 मिनट पर चलेगी, जो देवबंद, मुजफ्फरनगर, खतौली होते हुए मेरठ सिटी स्टेशन पर शाम को 4.35 मिनट पर पहुंचेगी और 4.40 पर रवाना हो जाएगी। मेरठ से रवाना होने के बाद यह ट्रेन हापुड़ शाम 5.20 बजे पहुंचेगी और 10 मिनट के स्टापेज के बाद शाम 5.30 बजे रवाना होगी। इसके बाद मुरादाबाद, बरेली होते हुए यह ट्रेन रात 1.45 बजे लखनऊ पहुंचेगी। लखनऊ में भी 10 मिनट के स्टापेज के बाद 1.55 बजे प्रयागराज के लिए रवाना होगी। प्रयागराज सुबह 6.30 बजे पहुंचने का समय होगा। अर्थात वर्तमान में जो ट्रेन लखनऊ सुबह 5.00 बजे बजे पहुंचती है तो एक अक्तूबर से यह रात में 1.45 बजे ही पहुंच जाएगी। इस तरह मेरठ से लखनऊ के लिए नौचंदी एक्सप्रेस का सफर अब मुश्किल भरा हो जाएगा। हालांकि मेरठ से प्रयागराज का सफर आसान रहेगा, लेकिन नौचंदी जिस सफर के लिए अब तक जानी थी तो वह मुश्किल भरा रहेगा। उधर, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन के समय को लेकर वार्ता जारी है। जल्द इस पर कुछ निर्णय लिया जाएगा। दूसरी तरफ आईआरसीटीसी ने नौचंदी एक्सप्रेस के आगामी एक अक्तूबर से सहारनपुर से संचालन का टाइम टेबल जारी कर दिया है। जो लोग नौचंदी एक्सप्रेस से अपना टिकट बुक करा रहे हैं उसमें बदला हुआ समय अंकित हो रहा है।

सहारनपुर को राहत, मेरठ की मुश्किलें वैसे सहारनपुर को नौचंदी के नए टाइम टेबल से राहत है। अब पूरी ट्रेन सहारनपुर से चलेगी।


पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन
 
पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन
गुरूवार को पुलिस लाइन में बरामद मोबाइल फोन उनके मालिकों को सौंपा गया।
पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन
बरामद किये गये मोबाइल फोन।
पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन
पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन
पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन
पुलिस ने बरामद किए 21 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन

मेरठ क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम ने पिछले दो साल में गुम और चोरी हुए 101 मोबाइल फोन गुरुवार को बरामद कर लिए। इन मोबाइल की कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस लाइन में सभी मोबाइल फोन को उनके मालिकों को सौंपा गया। अपना खोया फोन पाकर लोगों के चेहरे खिल गए।

मेरठ पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता करते हुए एसपी क्राइम अनित कुमार ने बताया कि पिछले कुछ माह में जिन लोगों के मोबाइल चोरी या गुम हुए थे, उनकी शिकायतें सर्विलांस सेल को दी गई थीं। इन मोबाइलों के आईएमईआई नंबर को सर्विलांस पर लगाया गया था। जब इन मोबाइल में दूसरा सिम डालकर चलाया गया तो सर्विलांस टीम मेरठ को पता चल गया। इसके बाद ये मोबाइल चलाने वालों से फोन वापस लिए गए और इनका सत्यापन कराया गया। उन्हें क्लीन चिट दी गई और मोबाइल रिकवर दिखाया गया। इन्हीं 101 मोबाइल को इनके मालिकों को वापस किया गया है। एसपी क्राइम अनित कुमार ने बताया कि इन मोबाइल की कीमत बाजार के हिसाब से करीब 21 लाख रुपये है। यह भी बताया कि ये मोबाइल फोन गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर, शामली, बुलंदशहर और एटा में चलाए जा रहे थे। प्रेसवार्ता में सीओ क्राइम रूपाली राय भी मौजूद रहीं। प्रेस वार्ता के बाद सभी मोबाइल उनके मालिकों को वापस किए गए।

मौत से पहले पिता ने दिया था उपहार

मलियाना के रहने वाले अंशुल को मेरठ क्राइम ब्रांच ने कॉल करके बुधवार शाम को बताया कि उनका जो मोबाइल गुम हो गया था, वह मिल गया है। अंशुल मोबाइल लेने के लिए गुरुवार को मेरठ पुलिस लाइन पहुंचे।

जिस दिन किश्त पूरी हुई, उसी दिन बरामद

कंकरखेड़ा के लाला महमदपुर निवासी मोहम्मद समीर का मोबाइल ओप्पो ए-57 भी क्राइम ब्रांच ने बरामद किया है। समीर ने बताया कि सात माह पूर्व यह मोबाइल 16 हजार 500 रुपये में किश्तों पर खरीदा था।

घर खर्च से बचाई थी रकम

ब्रह्मपुरी के गौतमनगर निवासी परवेश कुमार ने बताया कि साइकिल पर झाडू और अन्य सामान बेचने का काम करते हैं। पहले वह छोटा सा कीपैड वाला मोबाइल चलाते थे। पत्नी को घर खर्च के लिए जो रकम देता था, उसी में से कुछ पैसा हर माह बचा लेती थी। परवेश ने बताया कि शादी की साहगिरह पर पत्नी ने ये मोबाइल गिफ्ट दिया था।


तीन कारों में सवार थे 14 युवक, चलती कारों की खिड़कियों से बाहर निकल खूब किया हंगामाकार सवारों का हुड़दंग, मौत का स्टंट
 
कार सवारों का हुड़दंग, मौत का स्टंट

कार सवारों का हुड़दंग, मौत का स्टंट
मवाना में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा जमकर स्टंट दिखाते कार सवार।

मवाना, फलावदा तिराहे पर बुधवार को तीन कारों में सवार 14 युवकों को मौत का स्टंट करते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। सड़क पर हुए इस जानलेवा स्टंट ने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस ने स्टंट की वीडियो देखने के बाद मामले की कार्रवाई की बात कही है।

बता दें कि मवाना में मेरठ रोड पर फलावदा तिराहे के पास बुधवार शाम के समय तीन कारों में सवार युवक खतरनाक स्टंट कर रहे हैं। जो वीडियो सामने आया है, उसमें साफतौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह से बारी-बारी से युवक कार से बाहर निकलकर तरह-तरह के स्टंट पर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। वहीं, सबसे व्यस्ततम ट्रैफिक वाली सड़क पर इस तरह के स्टंट कर रहे युवकों ने गुजरने वाले राहगीरों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। फिलहाल पुलिस काफी संवेदनशील दिख रही है। वीडियो को देखने के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।

जरा सी लापरवाही पड़ सकती थी भारी वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह से युवक अपनी जान जोखिम में डालकर खतरनाक स्टंट को अंजाम दे रहे हैं। जरा सी लापरवाही से उनकी जान भी जा सकती थी।

फिलहाल यह मामला पुलिस ने जांच में लिया है। इस नजारे को देखने वालों की भी कुछ समय के लिए सांसे अटकी रह गई। बीच सड़क पर कार सवार युवक थाने के सामने से स्टंट करते हुए चले गए। पुलिस ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही रही है।



आज की ताजा खबर 28/09/2023

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के 20 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया

भारत जल्द महाशक्ति बनेगामोदी
 
भारत जल्द महाशक्ति बनेगामोदी

अहमदाबाद में बुधवार को वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने साइंस सिटी का दौरा किया। इस दौरान एक रोबोट ने उन्हें चाय परोसी। 

भारत जल्द महाशक्ति बनेगामोदी

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि उनका लक्ष्य भारत को वैश्विक विकास का इंजन बनाना है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश जल्द दुनिया की आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरेगा।

एक संस्थान बन गया है वाइब्रेंट गुजरात नरेंद्र मोदी वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के 20 साल पूरे होने पर यहां साइंससिटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन की पूरी यात्रा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 20 साल पहले वाइब्रेंट गुजरात के छोटे-छोटे बीज बोए थे। आज यह एक वट वृक्ष बन गया है। मोदी ने विस्तार से बताया कि कैसे एक साधारण शुरुआत से, वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम एक संस्थान में बदल गया है। पूरे साल यहां विकास के इंजन को रफ्तार देने का काम किया जाता है। साथ ही इससे जुड़े अधिकारी भी अब कार्यक्रम को बखूबी समझकर राज्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने का काम कर रहे हैं।

पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब ये आयोजन किए जा रहे थे तब तत्कालीन केंद्र सरकारें गुजरात की औद्योगिक प्रगति के प्रति उदासीन थी। विकास के रास्ते में रोड़े अटकाती थीं। उनके मुताबिक जो भी निवेशक गुजरात में निवेश करने के इच्छुक होते उन्हें यहां आने से मना किया जाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात वाइब्रेंट समिट ऐसे दौर में शुरू करने की कल्पना की गई जब राज्य भूकंप की त्रासदी से उबर ही रहा था।

पिछली सरकारों को घेरा

भूकंप आते ही मोबाइल पर तुरंत मिल जाएगी चेतावनी

 नई दिल्ली, गूगल भारत में एक भूकंप अलर्ट (चेतावनी) सेवा शुरू करेगी। यह सेवा एंड्रॉयड स्मार्टफोन में सेंसर का उपयोग करके भूकंप का अनुमान और उसकी तीव्रता का पता लगाने का काम करेगी।

गूगल ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के परामर्श के साथ भारत में ‘एंड्रॉयड भूकंप अलर्ट सिस्टम’ पेश किया है। कंपनी ने कहा, एनडीएमए और एनएससी के परामर्श के साथ आज हम भारत में एंड्रॉयड भूकंप अलर्ट प्रणाली पेश कर रहे हैं।


सपा के राष्ट्रीय सचिव बने प्रभुदयाल वाल्मीकि

सपा के राष्ट्रीय सचिव बने प्रभुदयाल वाल्मीकि

पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि।

मवाना। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश अखिलेश यादव ने पूर्व मंत्री पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय सचिव मनोनीत किया है। इससे सपा में पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि का कद बढ़ गया है।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय सचिव नामित कर उनसे पार्टी में सक्रियता निभाते, अच्छा कार्य करने की उम्मीद की है। उनके राजनीति सफर के अनुसार प्रभुदयाल वाल्मीकि वर्ष 2002 में पहली बार हस्तिनापुर विधान सभा सीट से सपा से विधायक बने और करीब छह माह बाद वर्ष 2003 में प्रदेश में सपा की सरकार बनी, जिसमें प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें प्रदेश में काम करने का मौका देते हुए लघु उद्योग व रेशम विभाग का राज्य मंत्री बनाया था। इसके बाद प्रभुदयाल वाल्मीकि पार्टी की सेवा करते रहे। दोबारा सपा ने उन पर भरोसा करते हुए वर्ष 2012 में टिकट पर चुनाव लड़ाया और दोबारा विधायक चुने गये। पांच साल तक सेवा करते रहे।

पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि ने बताया कि उन्हें कई बार मौके मिले और उन्हें लुभावने पद का ऑफर भी दिया गया, लेकिन वे सपा के वफादार सिपाही हैं। वहीं प्रभुदयाल वाल्मीकि ने राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सपा के वरिष्ठ नेताओं का आभार जताया है। सपा के राष्ट्रीय सचिव बनाये जाने पर प्रधानाचार्य डॉक्टर देवेंद्र कुमार, शिक्षक नेता चौधरी नरेश पाल सिंह, सुधीर कामिल, कृष्ण पाल यादव, हाजी इरफान मलिक, रईस आजम, सतपाल भगत, मास्टर खिलाड़ी सिंह, निर्मित यादव, मिंटू चौधरीएडवोकेट ने बधाईदी।


कर्ण मंदिर भूमि जांच को दस दिन का समय मांगा
 हस्तिनापुर, प्राचीन कर्ण मंदिर भूमि विवाद का मामला अभी समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है। भूमि की जांच में लगे प्रशासन ने इस मामले में अगले दस दिन का समय और बढ़ाया गया है।

कस्बे में मौजूद महाभारत कालीन प्राचीन कर्ण मंदिर के महंत शंकर देव महाराज ने मंदिर की भूमि विवाद को लेकर चकबंदी विभाग पर सांठ गांठ का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हीं की लापरवाही से दूसरे पक्ष के हक में फैसला गया है जिस मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच नहीं की गई है जिसके बाद उन्होंने 13 सितंबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच करने की मांग करते हुए अग्नि समाधि लेने की घोषणा की थी जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़काम मच गया।

18 सितंबर को अग्नि समाधि की घोषणा की गई थी जिसके बाद एसडीएम अखिलेश यादव और सीओ आशीष शर्मा ने महंत शंकर देव महाराज से मंदिर पर वार्ता की ओर इस मामले में अगले 10 दोनों का समय मांगा था जिस बीच भूमि मामले की पूरी जांच में टीम लगाई गई।

हमारे पितृ कल से पधारेंगे घर, तर्पण के जल से होंगे तृप्त

 
हमारे पितृ कल से पधारेंगे घर, तर्पण के जल से होंगे तृप्त
हमारे पितृ कल से पधारेंगे घर, तर्पण के जल से होंगे तृप्त

कब होता है पितृ पक्ष भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर श्राद्ध पक्ष आश्विन मास की अमावस्या तक होता है। पूर्णिमा का श्राद्ध उनका होता है, जिनकी मृत्यु वर्ष की किसी पूर्णिमा को हुई हो। वैसे, ज्ञात, अज्ञात सभी का श्राद्ध आश्विन अमावस्या को किया जाता है।

जल और तिल ही क्यों श्राद्ध पक्ष में जल और तिल (देवान्न) द्वारा तर्पण किया जाता है। जो जन्म से लय (मोक्ष) तक साथ दे, वही जल है। तिलों को देवान्न कहा गया है। इससे ही पितरों को तृप्ति होती है।

तीन पीढ़ियों तक का ही श्राद्ध श्राद्ध केवल तीन पीढ़ियों तक का ही होता है। धर्मशास्त्रत्तें के मुताबिक सूर्य के कन्या राशि में आने पर परलोक से पितृ अपने स्वजनों के पास आ जाते हैं। देवतुल्य स्थिति में तीन पीढ़ी के पूर्वज गिने जाते हैं। पिता को वसु के समान, रुद्र दादा के समान और परदादा आदित्य के समान माने गए हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि मनुष्य की स्मरण शक्ति केवल तीन पीढ़ियों तक ही सीमित रहती है।

कौन कर सकता है तर्पण पुत्र, पौत्र, भतीजा, भांजा कोई भी श्राद्ध कर सकता है। जिनके घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं है लेकिन पुत्री के कुल में हैं तो धेवता और दामाद भी श्राद्ध कर सकते हैं।

कौआ, कुत्ता और गाय इनको यम का प्रतीक माना गया है। गाय को वैतरिणी पार करने वाली कहा गया है। कौआ भविष्यवक्ता और कुत्ते को अनिष्ट का संकेतक कहा गया है। इसलिए, श्राद्ध में इनको भी भोजन दिया जाता है। चूंकि हमको पता नहीं होता कि मृत्यु के बाद हमारे पितृ किस योनि में गए, इसलिए प्रतीकात्मक रूप से गाय, कुत्ते और कौआ को भोजन कराया जाता है।

कैसे करें श्राद्ध

● पहले यम के प्रतीक कौआ, कुत्ते और गाय का अंश निकालें ( इसमें भोजन की समस्त सामग्री में से कुछ अंश डालें)

● फिर किसी पात्र में दूध, जल, तिल और पुष्प लें। कुश और काले तिलों के साथ तीन बार तर्पण करें। ऊं पितृदेवताभ्यो नम पढ़ते रहें।

● वस्त्रत्तदि जो भी आप चाहें पितरों के निमित निकाल कर दान करें।

सूक्ष्म विधि

दूरदराज में रहने वाले, सामग्री उपलब्ध नहीं होने, तर्पण की व्यवस्था नहीं हो पाने पर एक सरल उपाय के माध्यम से पितरों को तृप्त किया जा सकता है। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े हो जाइए। अपने दाएं हाथ के अंगूठे को पृथ्वी की ओर करिए। 11 बार पढ़ें..ऊं तस्मै स्वधा नम। यह पितरों के प्रति आपकी भावांजलि होगी।

कब कौन सा श्राद्ध

पूर्णिमा का श्राद्ध 29 सितम्बर

प्रतिपदा /द्वितीया 30 सितम्बर

तृतीया 1 अक्तूबर

चतुर्थी 2 अक्तूबर

पंचमी 3 अक्तूबर

षष्ठी 4 अक्तूबर

सप्तमी 5 अक्तूबर

अष्टमी 6 अक्तूबर

नवमी 7 अक्तूबर

दशमी 8 अक्तूबर

एकादशी 9/10 अक्तूबर

(दोनों दिन मान्य)

द्वादशी 11 अक्टूबर

र्त्योदशी 12 अक्तूबर

पितृ विसर्जन अमावस्या 14 अक्तूबर

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

(जो सबके द्वारा पूजित, अमूर्त, अत्यन्त तेजस्वी, ध्यानी तथा दिव्यदृष्टि सम्पन्न हैं, उन पितरों को मैं सदा नमस्कार करता हूँ।)


आज गूजेंगी सबके प्यारे नबी हमारे की सदाएं, जलसे होंगे

मेरठ, ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर आज शहरभर में कार्यक्रम होंगे। शाहपीर गेट, घंटाघर और लालकुर्ती में कड़ी सुरक्षा के बीत जुलूस-ए-मोहम्मदी निकलेंगे। कई स्थानों पर सीरत उन नबी के जलसे होंगे। मिलाद शरीफ का आयोजन किया जाएगा। लालकुर्ती में नात, किरात एवं तकरीर के मुकाबलें होंगे। जिसमें 20 से अधिक मदरसों, स्कूलों के बच्चे भाग लेंगे। सभी कार्यक्रमों की तैयारियों को बुधवार शाम को अंतिम रूप दे दिया गया। दूसरी ओर, मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश के सिलसिले में मस्जिदों और घरों में सजावट की गई।

रऊफउल हसन एडवोकेट ने बताया कि जश्न ए ईद मिलादुन्नबी कमेटी मेरठ कैंट की ओर से कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर ली गई। हजरत बाले मियां के मुतवल्ली मुफ्ती मोहम्मद अशरफ ने बताया कि आज दरगाह परिसर में लंगर का आयोजन होगा। कार्यक्रम का आयोजन सात अक्तूबर को किया जाएगा। इधर, शाहपीर गेट नौगजा, बड़ी मस्जिद, घंटाघर से जुलूस निकलेगा। सैय्यद अहमद अली शत्तारी कादरी मकबरा शाहपीर शाह के मुख्य गेट से बाहर लंगर कराएंगे।


काम के हैं ये यूएक्स और यूआई कोर्स

डिजिटल दुनिया में यूएक्स और यूआई डिजाइनिंग की मांग बढ़ती जा रही है। टेक्नोलॉजी के जानकार और पेशेवरों के लिए इसमें अपस्किलिंग अच्छे अवसर देगी। यहां पेश हैं इसके कुछ अच्छे ऑनलाइन कोर्स

काम के हैं ये यूएक्स और यूआई कोर्स
काम के हैं ये यूएक्स और यूआई कोर्स

सॉफ्टवेयर, कंप्यूटिंग और आईटी के पेशेवरों के लिए यूजर इंटरफेस (यूआई) डिजाइन और यूजर एक्सपीरिएंस (यूएक्स) डिजाइनिंग का स्किल अच्छे मौके बना रहा है। इसके जानकार डिजिटल सर्विसेज, मोबाइल एप्लीकेशंस और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करते हैं।

क्या है यूआई और यूएक्स डिजाइनिंग यूजर इंटरफेस डिजाइनिंग किसी एप्लीकेशन या वेबसाइट से यूजर के संवाद को संभव और बेहतर बनाती है। वहीं यूजर एक्सपीरिएंस का मतलब है किसी डिजिटल उत्पाद को इस्तेमाल करने में यूजर का अनुभव कितना बेहतर रहा। यूएक्स एवं यूआई डिजाइन में ग्राफिक्स, इलस्ट्रेशन, इसकी कमियां, डिजिटल पेज के नेविगेशन बटन आदि की डिजाइनिंग करनी होती है।

यहां हम दे रहे हैं इसके कुछ ऑनलाइन कोर्सेज

● इंट्रोडक्शन टु यूजर एक्सपीरिएंस प्रिंसिपल मिशिगन यूनिवर्सिटी का यह ऑनलाइन कोर्स 6 हफ्ते का 4000 रुपयों के लगभग का है। www.coursera.org/learn/introtoux-principles-and-processes पर जानकारी लें।

● गूगल यूएक्स डिजाइन सर्टिफिकेट गूगल का यह कोर्स कोर्सेरा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। सात दिन में पूरा करने पर कोई फीस नहीं ली जाएगी। www.coursera.org/professional-certificates/ google-ux-design पर जानकारी ले सकते हैं।

● इंट्रोडक्शन टु यूजर एक्सपीरिएंस डिजाइन जॉर्जिया टेक स्कूल ऑफ इंटरैक्टिव कंप्यूटर प्रोफेशनल्स का यह कोर्स वीडियो, प्रैक्टिकल असाइनमेंट, गेम्स आदि के माध्यम से यूएक्स डिजाइन सिखाता है। लिंक है- www.coursera.org/learn/user-experience-design

● यूआई यूएक्स डिजाइन स्पेशलाइजेशन कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स का यह कोर्स 5 घंटे प्रति दिन देने पर 4 महीने में खत्म होता है। रुपये 4000 से 6000 रुपये फीस देनी पड़ सकती है। www.coursera.org/specializations/ui-ux-design पर विस्तार से जानकारी लें।

कुछ निशुल्क यूआई यूएक्स डिजाइन कोर्स

●ग्रेट लर्निंग का यूएक्स/यूआई कोर्स फॉर बिगनर्स

●उडेमी का यूजर एक्सपीरिएंस फंडामेंटल्स

●लिंक्डइन लर्निंग पर एक्सप्लोरिंग ए यूजर एक्सपीरिएंस डिजाइनर


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नई दिल्ली, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुलियों के साथ मुलाकात का वीडियो बुधवार को जारी कर महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि भारत का भार उठाने वालों के कंधे आज मजबूरियों के बोझ से झुके हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने पिछले सप्ताह आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर कुलियों के साथ मुलाकात की थी। इस दौरान उनकी समस्याओं के बारे में जाना था। राहुल गांधी ने बुधवार को इस मुलाकात का एक वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर जारी किया। उन्होंने कहा, कुछ दिनों पहले रामेश्वर जी (सब्जी विक्रेता) से मुलाकात हुई थी। इसकी खबर मिलते ही कुछ कुली भाइयों ने मुझे उनसे मिलने का अनुरोध किया। जैसे ही मुझे मौका मिला, मैं दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल पहुंच गया। कुली भारत के सबसे मेहनती लोगों में हैं।


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