वैश्विक सुरक्षा को लेकर महसूस की जा रही बहुपक्षीय रणनीति की जरूरत

नई दिल्ली में शनिवार को जी-20 स्थल की जांच करता सुरक्षाकर्मी। ● अरविंद यादव

नई दिल्ली, news जी-20 देशों की बैठक में एआई जैसी नई तकनीकी के मद्देनजर आतंकवाद, कट्टरपंथ की चुनौती सहित सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। इस संबंध में भारत में हुई कार्यसमूह की बैठक के निष्कर्षों को भी सदस्य देशों के सामने रखा जाएगा। भारत आतंकवाद के प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन करने वाले देशों को इस मंच से एक बार फिर से बेनकाब कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य मुद्दों के अलावा वैश्विक सुरक्षा और शांति एवं स्थिरता जैसे मुद्दों के साथ आतंक और कट्टरपंथ वैश्विक चिंता का मुद्दा है। नई उभरती तकनीक ने दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। आतंकी वित्तपोषण को रोकने का मुद्दा साझा मंच और द्विपक्षीय वार्ता की टेबल पर जरूर होगा। एक अधिकारी ने कहा कि आतंक से साझा लड़ाई और सुरक्षा एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य के एजेंडा में ही निहित है।
कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार
एफएटीएफ के साथ मिलकर नई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करना और ऑनलाइन कट्टरपंथ को रोकना जैसे मुद्दे इसमें शामिल हैं। इनके लिए साझा वैश्विक जवाबी प्रतिक्रिया की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
संस्थाएं मजबूत हों
सबसे अच्छा तरीका अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग के लिए आधिकारिक निगरानी संस्था एफएटीएफ के साथ काम करना है। सूत्रों ने कहा, एफएटीएफ ने अपना दायरा भी बढ़ाया है। लेकिन इसे मजबूत करने की जरूरत है।
क्रिप्टोकरेंसी से बढ़ी जटिलता पर चर्चा
नवंबर, 2022 में जी-20 और एफएटीएफ ने क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों के महत्व पर चर्चा की थी। इनका उपयोग आतंकी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए तेजी से किया जा रहा है। ऐसी नई प्रौद्योगिकियों के लिए नियामक उपकरणों की अनुपस्थिति आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने में एक चुनौती है। यह मुद्दा चर्चा में आ सकता है।
No comments:
Post a Comment