स्वामीनाथन ने अनाज संकट दूर किया

भारत को कृषि आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाले महान वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है। 1943 में बंगाल में भीषण अकाल देखकर उन्होंने खाद्यान्न की कमी को दूर करने के उद्देश्य से कृषि की पढ़ाई की। उन्होंने किसानों और सरकारी नीतियों के साथ-साथ अन्य वैज्ञानिकों की मदद से देश का अनाज संकट दूर किया।
कई पदों पर सेवाएं दीं 29/09/2023

एक कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन। उनका जन्म तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के कुंभकोणम में एक सर्जन डॉ. एमके संबासिवन और पार्वती थंगम्मल के घर हुआ था। ● फाइल फोटो



वामीनाथन ने 1943 में बंगाल में भीषण अकाल में भूख के कारण लाखों लोगों की मौत देखी और दुनिया से भूख मिटाने के लिए कृषि की पढ़ाई करने का निश्चय किया। उन्होंने दो स्नातक डिग्रियां हासिल कीं, जिनमें से एक कृषि महाविद्यालय, कोयंबटूर से थी।
1947 में वह अनुवांशिकी और पादप प्रजनन की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) आ गए। उन्होंने 1949 में साइटोजेनेटिक्स में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।
नोबेल विजेता बोरलॉग संग किया काम स्वामीनाथन उच्च उपज देने वाली गेहूं की किस्मों को विकसित करने पर प्रसिद्ध अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक और 1970 के नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग के साथ मिलकर काम किया।
गेहूं-चावल की फसल को बढ़ावा दिया स्वामीनाथन को 1960 के दशक के दौरान भारत में उच्च उपज देने वाली गेहूं और चावल की किस्मों के विकास और शुरुआत का नेतृत्व करने के लिए विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उस वक्त देश अकाल की आशंका से ग्रस्त था। विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन के अनुसार कुछ ही वर्षों में गेहूं का उत्पादन दोगुना हो गया।
जब नोबेल विजेता ने माना स्वामीनाथन की प्रतिभा का लोहा स्वामीनाथन ने 60 के दशक में नोबेल विजेता नॉर्मन बोरलॉग को नव विकसित मैक्सिकन प्रजाति के बीज भेजने के लिए पत्र लिखा था। बोरलॉग भारत की परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद ही बीज भेजने के लिए सहमत हुए। बोरलॉग मार्च 1963 में यहां आए। उत्तर भारत के प्रमुख गेहूं उगाने वाले क्षेत्रों का दौरा करने के बाद उन्होंने अक्टूबर 1963 में चार किस्मों के लगभग 100 किलोग्राम बीज भेजे। इन्हें 1963-64 में पंतनगर, कानपुर, लुधियाना और पूसा में परीक्षण क्षेत्रों में बोया गया।
नवंबर 1964 में दिल्ली के जौंती गांव के किसानों ने दो किस्म का गेहूं बोया। उनमें अधिकांश ने चार टन और कुछ ने 4.5 टन प्रति हेक्टेयर फसल प्राप्त की। तब बोरलॉग ने स्वीकार किया था, गेहूं की कम ऊंचाई के पौधों को सबसे पहले पहचानने का बड़ा श्रेय स्वामीनाथन को जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो एशिया में हरित क्रांति नहीं होती।
हरित क्रांति के केंद्र बिंदु बने आजादी के बाद वर्ष 1967 तक सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्रों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया लेकिन देश की जनसंख्या वृद्धि खाद्य उत्पादन की तुलना में बेहद तेज गति से बढ़ रही थी। इसका नतीजा हरित क्रांति के रूप में सामने आया। एमएस स्वामीनाथन ने भारत में इसका नेतृत्व किया।1960 में उन्होंने उच्च उपज देने वाली किस्मों गेहूं के बीज तैयार करने के लिए नॉर्मन बोरलॉग और अन्य वैज्ञानिकों के साथ काम किया। स्वामीनाथन ने छोटे पैमाने के किसानों को यह सिखाने के लिए 1965 में देश के उत्तरी हिस्से में सैकड़ों प्रदर्शनियों का आयोजन किया कि कैसे जेनेटिक रूप से विकसित फसलों से कम भूमि में उच्च उपज मिल सकती है। इन कोशिशों से हरित क्रांति के पहले वर्ष में फसल का उत्पादन तीन गुना हो गया।

सरधना में गणेश मूर्ति को नहर में विसर्जित करता सुक्का।

श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
हस्तिनापुर, कस्बे के रामलीला मैदान में चल रहे श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव में अंतिम दिन सर्वसिद्धिदायक गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की गई। गुरुवार को श्रद्धालुओं ने 121 किलो के लड्डू का भोग लगाया।
श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव में श्रद्धालु गणपति बप्पा का दर्शन कर पूजा अर्चना कर रहे हैं। शांतिकुंज गायत्री परिवार के प्रचारक सतीश चंद ने गणेश चतुर्थी के बारे में विस्तार से बताया। श्रद्धालुओं ने 121 किलो लड्डू का भोग लगाया। शाम को गणपति बप्पा की सामूहिक आरती की। जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम संयोजक रणधीर उपाध्याय ने बताया कि शुक्रवार को गणपति बप्पा की शोभायात्रा निकाल विसर्जन किया जाएगा।
गणपति उत्सव से लगी रही भीड़ रोहटा। भगवान गणेशजी जी मूर्ति के विसर्जन को भोला झाल पर दिनभर तांता लगा रहा। रोहटा गांव में शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पूरे गांव में झांकी निकाली गई। उसके बाद भोला झाल पर गंग नहर में गणेश मूर्ति की विसर्जन कराया गया।
बैंड बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा




क्षमा करें, नौचंदी का समय नहीं बदलवा सके माननीय
वैसे मेरठ के सभी जनप्रतिनिधियों, माननीय सांसद, राज्यसभा सांसद, मंत्री और विधायक का प्रयास भी सफल होता नहीं दिख रहा है। सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने तो इस मामले में सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा। रेल अधिकारियों से वार्ता की। राज्यसभा सांसद डा.लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी उत्तर रेलवे के जीएम से वार्ता की। आश्वासन मिला कि वर्तमान समय के आसपास ही संचालन होगा। सभी ने एक अक्तूबर से प्रस्तावित टाइम टेबल को अनुपयुक्त बताया। इसके बावजूद आईआरसीटीसी की ओर से नई टाइम टेबल के अनुसार ही बुकिंग शुरू कर दी। ऐसा लगता है कि माननीयों का प्रयास सफल होता नहीं दिख रहा। वैसे दो दिन का समय अभी शेष है। यदि उच्च स्तर से कोई आदेश हुआ तो समय बदल सकता है।
आईआरसीटीसी के अनुसार नया टाइम टेबल
स्टेशन आगमन प्रस्थान
सहारनपुर - 14. 15
देवबंद 14.43 14.45
मुजफ्फरनगर 15.00 15.05
खतौली 15.24 15.26
मेरठ कैंट 15.48 15.50
मेरठ सिटी 16.35 16.40
हापुड़ 17.20 17.30
मुरादाबाद 19.49 19.54
बरेली 21.15 21.17
हरदोई 23.09 23.11
लखनऊ 01. 45 01.55
प्रयागराज 6.30
मेरठ, मेरठ से चलने वाली नौचंदी एक्सप्रेस एक अक्तूबर से 23 डिब्बों की पूरी ट्रेन सहारनपुर से चलेगी। आईआरसीटीसी ने गुरुवार को इसका नया टाइम टेबल जारी कर बुकिंग शुरू कर दी। अब मेरठ से यह ट्रेन दोपहर बाद 4.40 बजे चलेगी। मेरठ में नौचंदी का स्टापेज भी मात्र पांच मिनट का ही रहेगा। ऐसे में अब यात्रियों को यह विशेष तौर से नोट करना होगा।
आईआरसीटीसी की ओर से जारी नए टाइम टेबल के अनुसार एक अक्तूबर से नौचंदी एक्सप्रेस सहारपुर से दोपहर 2.15 मिनट पर चलेगी, जो देवबंद, मुजफ्फरनगर, खतौली होते हुए मेरठ सिटी स्टेशन पर शाम को 4.35 मिनट पर पहुंचेगी और 4.40 पर रवाना हो जाएगी। मेरठ से रवाना होने के बाद यह ट्रेन हापुड़ शाम 5.20 बजे पहुंचेगी और 10 मिनट के स्टापेज के बाद शाम 5.30 बजे रवाना होगी। इसके बाद मुरादाबाद, बरेली होते हुए यह ट्रेन रात 1.45 बजे लखनऊ पहुंचेगी। लखनऊ में भी 10 मिनट के स्टापेज के बाद 1.55 बजे प्रयागराज के लिए रवाना होगी। प्रयागराज सुबह 6.30 बजे पहुंचने का समय होगा। अर्थात वर्तमान में जो ट्रेन लखनऊ सुबह 5.00 बजे बजे पहुंचती है तो एक अक्तूबर से यह रात में 1.45 बजे ही पहुंच जाएगी। इस तरह मेरठ से लखनऊ के लिए नौचंदी एक्सप्रेस का सफर अब मुश्किल भरा हो जाएगा। हालांकि मेरठ से प्रयागराज का सफर आसान रहेगा, लेकिन नौचंदी जिस सफर के लिए अब तक जानी थी तो वह मुश्किल भरा रहेगा। उधर, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन के समय को लेकर वार्ता जारी है। जल्द इस पर कुछ निर्णय लिया जाएगा। दूसरी तरफ आईआरसीटीसी ने नौचंदी एक्सप्रेस के आगामी एक अक्तूबर से सहारनपुर से संचालन का टाइम टेबल जारी कर दिया है। जो लोग नौचंदी एक्सप्रेस से अपना टिकट बुक करा रहे हैं उसमें बदला हुआ समय अंकित हो रहा है।
सहारनपुर को राहत, मेरठ की मुश्किलें वैसे सहारनपुर को नौचंदी के नए टाइम टेबल से राहत है। अब पूरी ट्रेन सहारनपुर से चलेगी।

गुरूवार को पुलिस लाइन में बरामद मोबाइल फोन उनके मालिकों को सौंपा गया।

बरामद किये गये मोबाइल फोन।




मेरठ क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम ने पिछले दो साल में गुम और चोरी हुए 101 मोबाइल फोन गुरुवार को बरामद कर लिए। इन मोबाइल की कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस लाइन में सभी मोबाइल फोन को उनके मालिकों को सौंपा गया। अपना खोया फोन पाकर लोगों के चेहरे खिल गए।
मेरठ पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता करते हुए एसपी क्राइम अनित कुमार ने बताया कि पिछले कुछ माह में जिन लोगों के मोबाइल चोरी या गुम हुए थे, उनकी शिकायतें सर्विलांस सेल को दी गई थीं। इन मोबाइलों के आईएमईआई नंबर को सर्विलांस पर लगाया गया था। जब इन मोबाइल में दूसरा सिम डालकर चलाया गया तो सर्विलांस टीम मेरठ को पता चल गया। इसके बाद ये मोबाइल चलाने वालों से फोन वापस लिए गए और इनका सत्यापन कराया गया। उन्हें क्लीन चिट दी गई और मोबाइल रिकवर दिखाया गया। इन्हीं 101 मोबाइल को इनके मालिकों को वापस किया गया है। एसपी क्राइम अनित कुमार ने बताया कि इन मोबाइल की कीमत बाजार के हिसाब से करीब 21 लाख रुपये है। यह भी बताया कि ये मोबाइल फोन गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर, शामली, बुलंदशहर और एटा में चलाए जा रहे थे। प्रेसवार्ता में सीओ क्राइम रूपाली राय भी मौजूद रहीं। प्रेस वार्ता के बाद सभी मोबाइल उनके मालिकों को वापस किए गए।
मौत से पहले पिता ने दिया था उपहार
मलियाना के रहने वाले अंशुल को मेरठ क्राइम ब्रांच ने कॉल करके बुधवार शाम को बताया कि उनका जो मोबाइल गुम हो गया था, वह मिल गया है। अंशुल मोबाइल लेने के लिए गुरुवार को मेरठ पुलिस लाइन पहुंचे।
जिस दिन किश्त पूरी हुई, उसी दिन बरामद
कंकरखेड़ा के लाला महमदपुर निवासी मोहम्मद समीर का मोबाइल ओप्पो ए-57 भी क्राइम ब्रांच ने बरामद किया है। समीर ने बताया कि सात माह पूर्व यह मोबाइल 16 हजार 500 रुपये में किश्तों पर खरीदा था।
घर खर्च से बचाई थी रकम
ब्रह्मपुरी के गौतमनगर निवासी परवेश कुमार ने बताया कि साइकिल पर झाडू और अन्य सामान बेचने का काम करते हैं। पहले वह छोटा सा कीपैड वाला मोबाइल चलाते थे। पत्नी को घर खर्च के लिए जो रकम देता था, उसी में से कुछ पैसा हर माह बचा लेती थी। परवेश ने बताया कि शादी की साहगिरह पर पत्नी ने ये मोबाइल गिफ्ट दिया था।


मवाना में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा जमकर स्टंट दिखाते कार सवार।
मवाना, फलावदा तिराहे पर बुधवार को तीन कारों में सवार 14 युवकों को मौत का स्टंट करते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। सड़क पर हुए इस जानलेवा स्टंट ने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस ने स्टंट की वीडियो देखने के बाद मामले की कार्रवाई की बात कही है।
बता दें कि मवाना में मेरठ रोड पर फलावदा तिराहे के पास बुधवार शाम के समय तीन कारों में सवार युवक खतरनाक स्टंट कर रहे हैं। जो वीडियो सामने आया है, उसमें साफतौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह से बारी-बारी से युवक कार से बाहर निकलकर तरह-तरह के स्टंट पर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। वहीं, सबसे व्यस्ततम ट्रैफिक वाली सड़क पर इस तरह के स्टंट कर रहे युवकों ने गुजरने वाले राहगीरों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। फिलहाल पुलिस काफी संवेदनशील दिख रही है। वीडियो को देखने के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।
जरा सी लापरवाही पड़ सकती थी भारी वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह से युवक अपनी जान जोखिम में डालकर खतरनाक स्टंट को अंजाम दे रहे हैं। जरा सी लापरवाही से उनकी जान भी जा सकती थी।
फिलहाल यह मामला पुलिस ने जांच में लिया है। इस नजारे को देखने वालों की भी कुछ समय के लिए सांसे अटकी रह गई। बीच सड़क पर कार सवार युवक थाने के सामने से स्टंट करते हुए चले गए। पुलिस ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही रही है।
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