

कितनी कारगर है फिजियोथेरेपी
●हड्डियों से जुड़ी अन्य समस्याएं जोड़ों में सूजन, दर्द, कमजोरी, और कड़ापन जैसे लक्षण कई तरह के गठिया में दिखते हैं। आर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, ऑर्थोपेडिक फिजिकल थेरेपी से दर्द में आराम रहता है। जोड़ों में विकृति रोकने में मदद मिलती है। मजबूती, लचीलापन व संतुलन बढ़ता है।
●स्पोर्ट्स इंजरी खेल के दौरान चोटिल होने से जुड़ी कई समस्याओं में फिजियोथेरेपी की मदद से समस्या को गंभीर होने से रोकने, दर्द कम करने, क्षतिग्रस्त भाग को मजबूत करने और मोशन में सुधार करने में मदद मिलती है। कई मामलों में सर्जरी कराने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
●दर्द से आराम सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, फिजिकल थेरेपी दर्द से राहत पाने में पेन कीलर्स जितनी ही प्रभावी है। फिजियोथेरेपी के लगातार कुछ सेशेंस से स्पॉन्डिलाइटिस, सर्वाइकल, फ्रोजन शोल्डर, कमर दर्द, साइटिका आदि में बड़ा आराम मिलता है।
●न्यूरोलॉजिकल समस्याएं तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं जैसे स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसन्स डिजीज और स्पाइनल कॉर्ड में लगी चोटों में भी इस थेरेपी से आराम मिलता है। स्ट्रोक के मरीजों में फिजिकल थेरेपी सामान्य जीवन जीने में काफी मदद करती है।
●पोस्ट सर्जरी रिकवरी घुटना प्रत्यारोपण, हिप रिप्लेसमेंट व स्ट्रोक की स्थिति में सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह ठीक होने के लिए फिजिकल थेरेपी जरूरी होती है। कई बार यह थेरेपी लंबी भी चलती है, ऐसे में धैर्य बनाए रखना जरूरी है। कुछ सेशंस के बाद व्यक्ति व्यायाम व निजी उपकरणों की मदद से स्वयं उपचार करने में सक्षम हो जाता है।
●बड़ी उम्र से जुड़ी समस्याएं जेरीएट्रिक फिजिकल थेरेपी से बुजुर्गों की उन समस्याओं पर काम करते हैं, जो उनकी गतिविधियों व संतुलन को प्रभावित करती हैं। इनमें गठिया, अल्जाइमर, जोड़ बदलवाना, पेशाब पर नियंत्रण न रहना जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसकी मदद से उनकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
हमारे विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु चंपानेरी, वरिष्ठ न्यूरोविशेषज्ञ, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल, गुरुग्राम
डॉ. इंद्रामणी उपाध्याय, एचओडी, फिजियो डिपार्टमेंट, हीलिंग ट्री हॉस्पिटल, गाजियाबाद
लाभ
● दर्द का प्रबंधन ● सर्जरी से बचाव ● लचीलापन और सक्रियता में सुधार आना ● इंजरी और ट्रॉमा में राहत मिलना ● लकवा और स्ट्रोक से जल्दी स्वास्थ्य लाभ ● शरीर का संतुलन बेहतर होना ● उम्र के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन में मदद।
फिजियोथेरेपी क्या है ?
आप किसी गंभीर चोट से उबरने की कोशिश कर रहे हैं या सर्जरी के बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं या किसी गंभीर बीमारी के कारण शारीरिक गतिविधियां सीमित हो गई हैं। फिजिकल थेरेपी इन स्थितियों से बाहर आने में आपकी मदद कर सकती है। अमेरिकन फिजिकल थेरेपी असोसिएशन (एपीटीए) के अनुसार, मस्क्युलोस्केलेटल समस्याओं में ही नहीं विभिन्न न्यूरोलॉजिल समस्याओं में भी फिजियोथेरेपी कारगर है। हालांकि, कई समस्याओं में इससे सीधे तौर पर राहत नहीं मिलती, पर इससे हालत में सुधार तेजी से होता है और दर्द में राहत मिलती है। जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन के अनुसार, फिजियोथेरेपी दर्द व दवा से बचने का एक चिकित्सकीय विकल्प है। अधिकतर लोग मानते हैं कि दो-चार मशीनें, कुछ कसरतें ही फिजियोथेरेपी होती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। फिजियोथेरेपी में शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हड्डियों, नसों की परेशानी को वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक मशीनों के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया जाता है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों, सभी उम्र के लिए कारगर है।
आज शरीर की अलग-अलग समस्याओं के लिए विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट होते हैं। निष्क्रिय जीवनशैली, पेशेवर तनाव, खानपान की गलत आदतों और गैजेट्स के बढ़ते चलन के कारण अधेड़ उम्र के लोगों में ही नहीं, युवाओं को भी कई समस्याएं हो रही हैं। साइटिका, फ्रोजन शोल्डर, कमर के निचले हिस्से में दर्द होना, जोड़ों में दर्द, गर्दन में दर्द, मांसपेशियों में तनाव और खिंचाव जैसी समस्याओं में फिजियोथेरेपी बहुत कारगर है और सर्जरी से बचा सकती है।
बड़ा है फिजियोथेरेपी का दायरा
व्यायाम के अलावा इनकी भी बड़ी भूमिका रहती है।
●आयन्टोफोरेसिस इसमें निश्चित दवाओं जैसे टॉपिकल स्टेरॉयड को शरीर के भीतर पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक करंट का इस्तेमाल करते हैं, इससे सूजन में कमी आती है।
●इलेक्ट्रिकल स्टीम्युलेशन (ई-स्टिम) ई-स्टिम दो तरह के होते हैं। ट्रांसक्युटेनस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टीम्युलेशन (टेन्स) का प्रयोग दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। न्यूरोमस्क्युलर इलेक्ट्रिकल स्टीम्युलेशन मस्क्युलर (एनईएम) मोटर यूनिट्स को स्टीम्युलेट करते हैं, ताकि मांसपेशियों की गतिविधियों में सुधार लाया जा सके।
●हीट एंड कोल्ड थेरेपी दर्द और सूजन जैसी स्थितियों से इनका इस्तेमाल होता है।
●लाइट थेरेपी इसमें कुछ विशेष चिकित्सकीय स्थितियों को ठीक करने के लिए स्पेशल लाइट्स और लेजर का इस्तेमाल करते हैं।
फिजियोथेरेपी की प्रक्रिया
फिजियोथेरेपी में कुछ खास मूवमेंट्स से उपचार किया जाता है। यह मरीज की स्थिति व उम्र पर निर्भर करता है।
●एक्टिव मूवमेंट यह ट्रीटमेंट उन मरीजों के लिए होता है, जो व्यायाम करने में सक्षम होते हैं। ऐसे मरीजों के शरीर की अकड़न को दूर करने और मांसपेशियों की शक्ति को दोबारा लाने के लिए खास व्यायाम कराए जाते हैं।
●पैसिव मूवमेंट कुछ मरीजों को ऑपरेशन के बाद या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण बेड से उठने में समस्या होती है। ऐसे मरीजों का उपचार पैसिव मूवमेंट से किया जाता है। शरीर में आए कड़ेपन को गर्मी देकर व्यायाम कराया जाता है, जिससे शरीर की मांसपेशियों का कड़ापन कम होता है और शरीर में फिर से मूवमेंट शुरू हो जाती है।
●कन्टीन्युअस पैसिव मूवमेंट इसमें व्यायाम या कई बार आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करके उपचार करते हैं। हॉट पैक, आइस पैक व हाइड्रोथेरेपी भी शामिल होते हैं।
इन बातों का ध्यान रखें
●फिजियोथेरेपिस्ट का चयन सोच-समझकर करें, जो आपकी जरूरतों को समझे। उसके पास जरूरी उपकरण हों। वह सूक्ष्म व्यायाम कराने के लिए भी तैयार रहे।
●आप पूरी गंभीरता से फिजियोथेरेपिस्ट की बताई बातों का पालन करें। जल्दबाजी न करें। अगर एक्सरसाइज करते समय दर्द या परेशानी होती है तो खुलकर बात करें।
●फिजियोथेरेपी का कोर्स पूरा करें, उसे बीच में ही न छोड़ें। कई मामलों में कोर्स लंबा चलता है।
तैयार रहें साइड इफेक्ट्स के लिए
ऑस्ट्रेलियन फिजियोथेरेपी एसोसिएशन के अनुसार कुशल और प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट से कराने के बहुत से फायदे हैं। पर, कभी-कभी उपचार के दौरान या बाद में दर्द और बैचेनी बढ़ जाती है। ऐसे में डॉक्टर व फिजियोथेरेपिस्ट दर्द निवारक दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं। सेशन लेने के बाद गर्म व ठंडी सेंक या ट्रॉपिकल ट्रीटमेंट की जरूरत भी पड़ सकती है, क्योंकि मांसपेशियों, लिगामेंट्स व टेंडन में खिंचाव होता है। आमतौर पर कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। यह उपचार थोड़ा मंहगा है। कई बार परिणाम तुरंत मिल जाते हैं तो कभी देर लग जाती है, ऐसे में मानसिक रूप से तैयार रहें।
No comments:
Post a Comment