Monday, September 4, 2023

कृष्ण एक जीवन शैली

 मनसा वाचा कर्मणा

कृष्ण एक जीवन शैली
 
कृष्ण एक जीवन शैली

News हर साल श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है, उनके जीवन की घटनाओं की झांकियां सजाकर, लेकिन उनका असली संदेश पता नहीं कब हम समझ सकेंगे और जी पाएंगे! ओशो ने कृष्ण के व्यक्तित्व का बहुत सुंदर आकलन किया है। वह कहते हैं, कृष्ण का व्यक्तित्व अनूठा है और इस अनूठेपन की पहली बात यह है कि कृष्ण हुए तो अतीत में, लेकिन हैं वह भविष्य के लिए। मनुष्य अब भी इस योग्य नहीं बन पाया कि वह कृष्ण का समसामयिक बन सके। अभी भी कृष्ण मनुष्य की समझ के बाहर हैं, क्योंकि समाज इतना उन्नत नहीं हुआ है कि उनके जैसा स्वच्छंद जीवन जिया जाए। कृष्ण अकेले ऐसे व्यक्तित्व हैं, जो धर्म की अतल गहराइयों और परम ऊंचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं हैं, उदास नहीं हैं। उनके जीवन में इतने संकट आए, लेकिन वह कभी भी गंभीर नहीं दिखाई दिए। उनके जिस हाथ में मुरली है, उसी में वह सुदर्शन चक्र भी धारण कर सकते हैं। गीता जैसा गहन शास्त्र उन्होंने इतनी सहजता से कहा, जैसे कोई गीत गा रहे हों।

आज हम समय के जिस मोड़ पर हैं, वह फ्रायड के बाद की दुनिया है। फ्रायड के पूर्व धर्म की जो दुनिया थी, वह फ्रायड के पश्चात नहीं हो सकती है। एक बड़ी क्रांति घटित हो गई है और एक बड़ी दरार पड़ चुकी है मनुष्य-चेतना में। एक नई समझ पैदा हो गई है। पुराना धर्म आदमी को दमन और ध्वंस सिखाता था। काम है, क्रोध है, लोभ है, मोह है, सभी को दबाना है और नष्ट कर देना है। मगर श्रीकृष्ण अकेले हैं, जो शरीर को उसकी समस्तता में स्वीकार कर लेते हैं। तो भविष्य के लिए कृष्ण की बड़ी सार्थकता है।

पहली बार मनुष्य इस योग्य होगा कि दमन से मुक्त होकर जीवन जिए। आसान है यह समझना कि आदमी संसार को छोड़कर चला जाए और शांत हो जाए। कठिन है इस बात को समझना कि संसार के संघर्ष में शांत कैसे रहा जाए? बहुत आसान है कि आदमी विरक्त हो जाए, आसक्ति के संबंध तोड़कर भाग जाए और शांति पा ले। कठिन है यह समझना कि जीवन के सारे उपद्रवों के बीच खड़े रहते हुए भी उसकी लौ कंपित न हो।

अगर हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी कृष्ण को समझे, तो सबसे पहले उनकी प्रतीकात्मक कहानियों से हमें उबरना होगा। आज की पीढ़ी के लिए वे झांकियां बहुत मायने नहीं रखतीं, बल्कि उन कहानियों का मर्म समझकर, उनमें जो ऊर्जा निहित थी, उसका उपयोग कर, आज की चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए, इसकी प्रेरणा कृष्ण से ली जा सकती है। आज रोजमर्रा का हमारा जीवन भी युद्ध जैसा हो गया है। ऐसे में, श्रीकृष्ण के हंसते-खेलते जीवन बिताने के संदेश को जीवन शैली बनाया जा सकता है। अंदर योगी और बाहर भोगी।

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