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Monday, April 27, 2020
कबीर, बन्दे तू कर बन्दगी, जे चाहे दीदार।
अवसर मानुष जन्म का, बहुर न बारम्बार।
परमेश्वर कबीर जी ने उपदेश दिया है कि हे मानव! यदि आप परमात्मा का दीदार अर्थात् दर्शन करना चाहते हैं तो परमात्मा की भक्ति करो। यह कार्य केवल मानव शरीर (स्त्री तथा पुरूष) में ही संभव है और मानव शरीर मिलना आसान नहीं है। ग्रन्थों में प्रमाण है कि 84 लाख प्रकार के अन्य प्राणियों के शरीरों में यातनाऐं झेलकर एक मानव शरीर प्राप्त होता है, मानव शरीर बार-बार नहीं मिलता। यदि मानव जीवन में पूर्ण संत से दीक्षा लेकर भक्ति नहीं की तो फिर से 84 लाख प्राणियों के शरीरों में कष्ट उठाना पड़ेगा। इसलिए मानव का बार-बार नहीं मिलता।
#Help_Them कहै कबीर पुकार के, दोय बात लख लेय।
एक साहेब की बंदगी, व भूखों को कुछ देय।।
हे मानव! मैं आवाज लगाकर ऊँचे स्वर से कह रहा हूँ कि मानव शरीर प्राप्त करके दो बातों पर ध्यान दें। एक तो परमात्मा की भक्ति कर दूसरी बात है कि भूखों को भोजन अवश्य कराना चाहिए। यह मानव का परम धर्म है। #Help_Them
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि जब कोई व्यक्ति क्रोधवश आप जी को गाली।देता है तो वह एक गाली देकर चुप हो जाता है। यदि आप जी ने उलट कर गाली दे दी तो वह तो तैयार है लड़ने के लिए, वह आपको अनेकों गालियाँ देगा। कबीर
जी कहते हैं मेरी राय है कि आप प्रतिउत्तर में गाली न देना, वह एक की एक ही रह जाएगी। बात आगे नहीं बढ़ेगी
अ गाली-गलौच से ही कलह अर्थात् झगड़े का जन्म होता है।
गाली ही से आत्मा को कष्ट होता है। गाली ही से झगड़ा बढ़ जाने से मृत्यु तक संभव है। यदि गाली देने वाले का उत्तर गाली से न देकर अपने आपको हारा यानि पराजित मान लेता है, वह संत है। यदि अन्य झगड़ालु की तरह झगड़ा करके मर-मिटता
है तो वह नीच व्यक्ति है। कबीर जी ने कहा है कि हरिजन अर्थात् परमात्मा का भक्त तो हारा ही अच्छा है क्योंकि भक्त प्रतिष्ठावश गलत कार्य नहीं करते। संसारी व्यक्ति आध्यात्म ज्ञान
से अपरीचित होने से मान-बड़ाई अर्थात् प्रतिष्ठावश अपना और सामने वाले का नाश करने पर तुल जाता है। ऐसे में परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि ऐसे महिमा के भूखे संसारी व्यक्ति को अपनी जीत का जश्न मनाने दे। वह तो काल के मुँह में जाएगा और भक्त जो हारकर झगड़ा न करके चला गया, वह भक्ति
करके परमात्मा के पास सत्यलोक में चला जाएगा। कबीर जी ने परम भक्त की स्थिति बताई है और जन साधारण का स्वभाव
बताया है। कहा है कि जितने घट अर्थात् मानव शरीरधारी व्यक्ति हैं, सबका भिन्न-भिन्न स्वभाव तथा विचारधारा है। जिस भक्त के लिए जीत तथा हार कोई महत्व नहीं रखती, उसमें ब्रह्म अर्थात् परमात्मा का प्यार समाया है। वह भक्त संसार से भिन्न स्वभाव का है।
एक साहेब की बंदगी, व भूखों को कुछ देय।।
हे मानव! मैं आवाज लगाकर ऊँचे स्वर से कह रहा हूँ कि मानव शरीर प्राप्त करके दो बातों पर ध्यान दें। एक तो परमात्मा की भक्ति कर दूसरी बात है कि भूखों को भोजन अवश्य कराना चाहिए। यह मानव का परम धर्म है। #Help_Them
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि जब कोई व्यक्ति क्रोधवश आप जी को गाली।देता है तो वह एक गाली देकर चुप हो जाता है। यदि आप जी ने उलट कर गाली दे दी तो वह तो तैयार है लड़ने के लिए, वह आपको अनेकों गालियाँ देगा। कबीर
जी कहते हैं मेरी राय है कि आप प्रतिउत्तर में गाली न देना, वह एक की एक ही रह जाएगी। बात आगे नहीं बढ़ेगी
अ गाली-गलौच से ही कलह अर्थात् झगड़े का जन्म होता है।
गाली ही से आत्मा को कष्ट होता है। गाली ही से झगड़ा बढ़ जाने से मृत्यु तक संभव है। यदि गाली देने वाले का उत्तर गाली से न देकर अपने आपको हारा यानि पराजित मान लेता है, वह संत है। यदि अन्य झगड़ालु की तरह झगड़ा करके मर-मिटता
है तो वह नीच व्यक्ति है। कबीर जी ने कहा है कि हरिजन अर्थात् परमात्मा का भक्त तो हारा ही अच्छा है क्योंकि भक्त प्रतिष्ठावश गलत कार्य नहीं करते। संसारी व्यक्ति आध्यात्म ज्ञान
से अपरीचित होने से मान-बड़ाई अर्थात् प्रतिष्ठावश अपना और सामने वाले का नाश करने पर तुल जाता है। ऐसे में परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि ऐसे महिमा के भूखे संसारी व्यक्ति को अपनी जीत का जश्न मनाने दे। वह तो काल के मुँह में जाएगा और भक्त जो हारकर झगड़ा न करके चला गया, वह भक्ति
करके परमात्मा के पास सत्यलोक में चला जाएगा। कबीर जी ने परम भक्त की स्थिति बताई है और जन साधारण का स्वभाव
बताया है। कहा है कि जितने घट अर्थात् मानव शरीरधारी व्यक्ति हैं, सबका भिन्न-भिन्न स्वभाव तथा विचारधारा है। जिस भक्त के लिए जीत तथा हार कोई महत्व नहीं रखती, उसमें ब्रह्म अर्थात् परमात्मा का प्यार समाया है। वह भक्त संसार से भिन्न स्वभाव का है।
Sunday, April 26, 2020
नमस्कार जी 🙏
आध्यात्मिक Books की PDF के लिए हमें आपका EMail order फेसबुक व whatsapp के माध्यम से मिला।।
आपको यह पीडीऍफ़ पुस्तके संत रामपाल जी महाराज जी की संस्था से भेजी जा रहीं हैं।
जिसमें आपको जानकारी मिलेगी
🔸सृष्टि की रचना कैसे हुई?
🔸हम जन्म से पहले कहां रहा करते थे?
🔸हम क्यों पैदा होते हैं, हम क्यों मरते हैं और मरने के बाद कहां जाते हैं?
🔸क्या कोई ऐसा सुखमय स्थान है जहां जाने के बाद कभी मृत्यु नहीं होती, न बुढापा आता, जहां किसी वस्तु का अभाव नहीं, जहां कोई काम नहीं करना पड़ता?
🔸इतनी भक्ति करने के बाद भी हम दुखी क्यों हैं, आपदाएं क्यों आती हैं?
🔸कौन हमें इन दुखों से आज़ादी दिला सकता है?
🔸कौन है इस आत्मा का असली रक्षक?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इन Books में मिलेंगे।
🌍पुस्तक पढ़ने के बाद यदि आप परमात्मा से वास्तविक लाभ प्राप्त करने के लिए तथा मनुष्य जीवन को सफल बनाने के लिए पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी से नामदान लेना चाहते हैं तो इस लिंके पर Click करके Form भरिये
⤵️
https://spiritualleadersaintrampalji.com/nam-diksha-inquiry
धन्यवाद
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धन्यवाद
Saturday, April 25, 2020
- *नमस्कार,*
*जिन्हें भी "ज्ञान गंगा" व "जीने की राह" बुक नहीं मिली उन्हें हम दोनों पुस्तकों की PDF भेज रहें आप उसे पढ़ सकते हैं*
*📌 GYAN GANGA HINDI BOOK👇👇👇*
https://www.jagatgururampalji.org/gyan_ganga_hindi.pdf
*📌 JINE KI RAH HINDI BOOK👇👇👇*
https://www.jagatgururampalji.org/jeene-ki-rah.pdf
*Lockdown खुलने के बाद आपके पास बुक भेज दी जाएगी...!!*
*सतलोक आश्रम हरियाणा जिला हिसार भारत*
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