Tuesday, August 22, 2023

लूना-25 का ध्वस्त होना हमारे लिए शुभ 22/08/2023

 लूना-25 का ध्वस्त होना हमारे लिए शुभ

 
लूना-25 का ध्वस्त होना हमारे लिए शुभ
लूना-25 का ध्वस्त होना हमारे लिए शुभ

लूना-25 की दुर्घटना हमारे लिए शुभ है। चूंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने का श्रेय भारत को न मिल जाए, इसलिए रूस ने बड़ी चालाकी से जल्दबाजी में अपने यान को चांद की ओर रवाना कर दिया था। मगर कहते हैं न कि ईश्वर के घर में देर है, अंधेर नहीं। हमारे वैज्ञानिकों ने पिछली बार भी कड़ी मेहनत की थी, लेकिन उनको सफलता नहीं मिल सकी। इस बार पिछली गलतियों से सबक लेकर काम किया गया है और उम्मीद है कि हमारा यान सुरक्षित चंद्रमा की सतह पर उतर सकेगा। यह बात रूस को पसंद नहीं आ रही थी। वह इस उपलब्धि को अपने खाते में जोड़ना चाहता था। मगर ऐन वक्त पर उसका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और भारत की उम्मीदें कहीं ज्यादा बढ़ गईं। चंद्रयान-3 जब चंद्रमा की सतह पर उतरेगा, तब वहां सुबह की शुरुआत हो चुकी होगी। वहां की सुबह का खास महत्व है, क्योंकि वहां एक दिन धरती के हिसाब से 14 दिनों के बराबर होता है, और चंद्रयान-3 सिर्फ 14 दिन काम करने के लिए बनाया गया है, यानी इन दिनों में चंद्रयान अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर लेगा, जबकि रूसी यान को ठंड में भी काम करने के अनुकूल बनाया गया था, ताकि वह एक साल तक वहां रह सके। चूंकि रूसी यान को भी दक्षिणी ध्रुव पर ही उतारने की योजना थी, इसलिए माना यही गया था कि रूस इस बात का श्रेय लेना चाहता है। मगर अब ऐसा नहीं होगा। अब दुनिया भर की नजर 23 तारीख पर टिकी है, जब चंद्रयान- 3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा और नई जानकारियों से दुनिया को विस्मित कर देगा।

स्वाति झा, गृहिणी

दहलीज पर खड़ी उपलब्धि

दुर्घटना से देर भली होती है। रूस का चंद्रयान लूना-25 तो क्रैश कर गया, लेकिन अपना चंद्रयान अब भी बखूबी अपने निर्धारित पथ पर अग्रसर है। ईश्वर करे कि हमारा यान सफलतापूर्वक चांद की सतह पर उतर जाए। अगर ऐसा हुआ, तो हमारे वैज्ञानिक अमिट इतिहास लिख देंगे। उल्लेखनीय है कि अपोलो-11 वह अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसने चंद्रमा पर पहले इंसान नील आर्मस्ट्रांग और एडविन ‘बज’ एल्ड्रिन जूनियर को 21 जुलाई, 1969 को चांद पर उतारा था। संयुक्त राज्य अमेरिका का यह मानव मिशन इतिहास और अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। वस्तुत इस घटना ने अमेरिका को एक विश्व-शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया था। ठीक यही उपलब्धि अब भारत की दहलीज पर भी है। कामना की जानी चाहिए कि हमारे वैज्ञानिकों की साधना का सुफल देश को मिले।

मनोज चौधरी, टिप्पणीकार

अनुलोम-विलोम

लूना-25

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