Friday, August 25, 2023

जेल पहुंचते ही ट्रंप समर्थकों की लगी भीड़

 

जेल पहुंचते ही ट्रंप समर्थकों की लगी भीड़



समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक, मालूम हो कि ट्रंप के जेल पहुंचते ही दर्जनों समर्थक ट्रंप के बैनर और अमेरिकी झंडे लहराते हुए उनकी एक झलक पाने के लिए इकट्ठा हो गए। बाहर एकत्र हुए ट्रम्प समर्थकों में जॉर्जिया के अमेरिकी प्रतिनिधि मार्जोरी टेलर ग्रीन भी थे, जो पूर्व राष्ट्रपति के सबसे वफादार कांग्रेस सहयोगियों में से एक थे। वहीं अटलांटा क्षेत्र में विमानन उद्योग से जुड़े 49 वर्षीय लाइल रेवर्थ गुरुवार सुबह से ही जेलखाने के पास 10 घंटे से इंतजार कर रहे थे।

सहयोगी ने किया था आत्मसमर्पण

ट्रंप को जॉर्जिया में 13 अलग-अलग मामलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें धोखाधड़ी का आरोप, झूठे बयान सहित कई मामले शामिल हैं। वहीं इससे पहले ट्रंप के पूर्व सहयोगी मार्क मीडोज ने फुल्टन काउंटी में आत्मसमर्पण कर दिया था। काउंटी की वेवसाइट के अनुसार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडोज ट्रंप के साथ उन 18 सह आरोपितों में से एक हैं जिन पर वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को पलटने के लिए साजिश रचने में ट्रंप की मदद करने का आरोप है।

चीन सैनिकों की तैनाती तनाव घटाने को तैयार

 ब्रिक्स सम्मेलन से इतर मोदी और जिनपिंग में लद्दाख मुद्दे पर बात हुई

चीन सैनिकों की तैनाती तनाव घटाने को तैयार
 
चीन सैनिकों की तैनाती तनाव घटाने को तैयार
जोहानिसबर्ग में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। ● एएफपी
ब्रिक्स में छह नए सदस्यों को शामिल किया गया

ब्रिक्स में छह नए देशों को सदस्यता मिल गई है। समूह के नेताओं ने गुरुवार को अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को नए सदस्यों के रूप में शामिल करने का फैसला किया। इससे एक लंबी प्रक्रिया पर मुहर लग गई। नए सदस्य एक जनवरी, 2024 से ब्रिक्स का हिस्सा बन जाएंगे। फैसले की घोषणा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने की। उन्होंने कहा, मार्गदर्शक सिद्धांतों, मानदंडों और प्रक्रियाओं को मजबूत करने के बाद नए सदस्यों के बारे में निर्णय पर सहमति बनी। रामफोसा ने कहा, ब्रिक्स विस्तार प्रक्रिया के पहले चरण पर हमारी आम सहमति है।

मोदी-जिनपिंग ने हाथ मिलाए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को गुरुवार को जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स नेताओं की मीडिया ब्रीफिंग से पहले संक्षिप्त बातचीत करते देखा गया। इस दौरान दोनों नेताओं ने हाथ मिलाए। इससे पहले नवंबर 2022 में बाली में जी20 बैठक के दौरान दोनों नेता मिले थे।

नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने को लेकर सहमत हो गए हैं। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बताया कि दोनों नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर गुरुवार को इस संबंध में बातचीत की।

क्वात्रा ने कहा कि इस संबंध में दोनों नेता संबंधित अधिकारियों को सैनिकों की शीघ्र वापसी और तनाव कम करने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश देने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने बताया कि मोदी ने जिनपिंग से कहा कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और एलएसी का सम्मान करना जरूरी है।

सीमा पर शांति जरूरी विदेश सचिव ने बताया कि बातचीत के दौरान मोदी ने जिनपिंग को पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर अनसुलझे मुद्दों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया। क्वात्रा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और एलएसी का निरीक्षण तथा सम्मान करना भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक है। मई, 2020 में शुरू हुए पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद भारत और चीन के संबंध अच्छे नहीं हैं।

बदलते दौर में खुद को बदलने की जरूरत इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में कहा कि इस समूह का आधुनिकीकरण और विस्तार यह संदेश है कि सभी वैश्विक संस्थानों को बदलते दौर में खुद को बदलने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि समूह के विस्तार का निर्णय बहुध्रुवीय दुनिया में कई देशों के विश्वास को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ब्रिक्स के विस्तार का पूरा समर्थन किया है तथा माना है कि नए सदस्यों के जुड़ने से समूह और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि तीन दिनों के विचार-विमर्श से कई सकारात्मक नतीजे निकले।

Thursday, August 24, 2023

बीजिंग, रायटर। ब्रिक्स में छह नए देश शामिल होंगे।

 बीजिंग, रायटर। ब्रिक्स में छह नए देश शामिल होंगे।



 दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने नए सदस्यों के शामिल होने का एलान किया। जिन सदस्यों को शामिल किया जाएगा, उनमें मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, इथियोपिया, अर्जेंटीना और ईरान शामिल हैं। ये सभी जनवरी 2024 से आधिकारिक सदस्य होंगे।


'हमने ब्रिक्स के विस्तार का लिया निर्णय'

समूह के नेताओं द्वारा मीडिया ब्रीफिंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने ब्रिक्स के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुझे विश्वास है कि हम समूह के नए सदस्य देशों के साथ काम करके ब्रिक्स को नई गतिशीलता दे पाएंगे।


पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा- ब्रिक्स की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर हमने इस मंच का विस्तार करने का निर्णय लिया है। भारत ने हमेशा इस विस्तार का पूरा समर्थन किया है। इस तरह का विस्तार ब्रिक्स को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाएगा। उस भावना में, भारत ब्रिक्स परिवार में अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का स्वागत करता है।


चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने गुरुवार को कहा कि ब्रिक्स के विस्तार से समूह के सहयोग तंत्र को नई गति मिलेगी। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन में शी ने कहा कि इस विस्तार ने एकता और सहयोग के लिए ब्रिक्स के दृढ़ संकल्प को प्रतिबिंबित किया है।


ब्रिक्स देशों के समूह ने छह देशों अर्जेंटीना, मिस्र, ईरान, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को ब्लॉक का नया सदस्य बनने के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया है।


BRICS में कौन-कौन देश शामिल हैं?

BRICS में पांच देश शामिल हैं। इन्हीं के नाम के पहले अक्षर को मिलाकर ब्रिक्स का निर्माण हुआ है। ब्रिक्स में B का मतबल ब्राजील, R का मतब रूस, I का भारत, C का मतबल चीन और  S का दक्षिण अफ्रीका से है। ब्रिक्स दुनिया की पांच सबसे तेज गति से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है।

विक्रम लैंडर से बाहर निकला रोवर, चंद्रमा पर कर रहा चहलकदमी; देखें पहली तस्वीर
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चंद्रयान-3 की कल सफल लैंडिंग के साथ इसरो ने इतिहास रच दिया। आज विक्रम लैंडर से प्रज्ञन रोवर भी बाहर निकल आया है। इसरो ने इसकी जानकारी दी है। इसरो ने अपने ट्वीट में लिखा, "चंद्रयान-3 का रोवर लैंडर से नीचे उतर गया। भारत ने चंद्रमा पर सैर की।" राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'विक्रम' लैंडर से रोवर 'प्रज्ञान' के सफलता पूर्वक बाहर आने के लिए इसरो की टीम को बधाई दी है।

 

चंद्रयान-3 की कामयाबी हम भारतीयों के लिए ही नहीं, दुनिया के लिए मील का पत्थर है। इससे चंद्रमा पर मौजूद तत्वों-खनिजों के बारे में अधिकाधिक जानकारियां मिलेंगी।

 

फैसला साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे

 स्कूली शिक्षा का नया ‘नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क’तैयार किया गया

फैसला साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे
 
फैसला साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे
फैसला साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे
फैसला साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे
फैसला साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे

प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन हो

व्यवसायिक शिक्षा, कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और सेहत एनसीएफ का अभिन्न हिस्सा है। इन मामलों में मूल्यांकन प्रदर्शन आधरित होना चाहिए। सिफारिश की गई है 75 प्रतिशत जोर प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन और 25 प्रतिशत मूल्यांकन लिखित परीक्षा पर हो।

छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का बोझ कम करना लक्ष्य

एनसीएफ के अनुसार, बोर्ड परीक्षा को पाठ्यक्रम के अनुरूप माध्यमिक स्तर पर क्षमताओं का मूल्यांकन करना चाहिए। ये परीक्षाएं छात्र के प्रदर्शन की वैध एवं विश्वसनीय तस्वीर पेश करने वाली होनी चाहिए। छात्रों पर बोर्ड परीक्षा के बोझ को कई कदमों के जरिये कम किया जा सकता है।

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का खाका चार स्तरों में बांटा

एनसीएफ को चार स्तर पर विभाजित किया गया है। पहला बुनियादी स्तर, जिसमें तीन से आठ वर्ष के छात्र आएंगे। दूसरा तैयारी स्तर है, जिसमें आठ से 11 वर्ष के छात्र होंगे। तीसरा मध्य स्तर, जिसमें 11 से 14 वर्ष के छात्र होंगे। चौथा माध्यमिक स्तर, जिसमें 14 से 18 आयु वर्ग के छात्र होंगे।

पाठ्य पुस्तकों की कीमतों में आएगी कमी

एनसीएफ के अनुसार, बोर्ड परीक्षाएं महीनों की कोचिंग और रट्टा लगाने की क्षमता के मुकाबले छात्र-छात्राओं की समझ और दक्षता के स्तर का मूल्यांकन करेंगी। कक्षाओं में पाठ्य पुस्तकों को कवर करने की मौजूदा प्रथा से बचा जाएगा और पाठ्य पुस्तकों की कीमतों में कमी लाई जाएगी।

नई दिल्ली, एजेंसी। शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा का नया ‘नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क’(एनसीएफ) तैयार किया है। इसके तहत बोर्ड परीक्षा साल में दो बार होगी। छात्र-छात्राओं को इसमें सर्वश्रेष्ठ अंक बरकरार रखने का विकल्प मिलेगा। एनसीएफ के अनुसार नौवीं एवं 10वीं कक्षा के छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें दो भारतीय भाषाएं होंगी।

11वीं और 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को दो भाषाओं का अध्ययन करना होगा, इनमें से कम से कम एक भाषा भारतीय होनी चाहिए। वर्तमान में 9वीं और 10वीं के छात्र दो भाषाओं का अनिवार्य रूप से अध्ययन करते हैं। वहीं, 11वीं व 12वीं कक्षा के छात्र एक भाषा का अध्ययन करते हैं। एनसीएफ में कहा गया कि 9-10वीं कक्षा के लिए सात विषय अनिवार्य होंगे, जबकि 11वीं-12वीं कक्षा के लिए छह विषय अनिवार्य होंगे।

इसरो के पूर्व प्रमुख के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार एनसीएफ के अनुसार स्कूल बोर्ड उचित समय में मांग के अनुसार परीक्षा लेने की क्षमता विकसित करेंगे। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नए ‘करिकुलम फ्रेमवर्क’ के आधार पर 2024 के शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्य पुस्तकें तैयार की जाएंगी।

पसंद का विषय चुन सकेंगे छात्र 11वीं और 12वीं में विषयों का चयन कला, विज्ञान, वाणिज्य स्ट्रीम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि छात्र-छात्राओं को अपनी पसंद का विषय चुनने की आजादी मिलेगी।

वर्तमान परीक्षा प्रणाली से तनाव दस्तावेज में कहा गया है कि वर्तमान में जिस तरह से बोर्ड परीक्षाएं ली जाती हैं, उससे किसी एक दिन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने से परिणाम पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। चूंकि ये परीक्षाएं साल में एक बार ली जाती हैं। ऐसी परीक्षाएं बहुत अधिक मात्रा में तथ्यों संबंधी परीक्षा से संबंधित होती हैं और इसके कारण तनाव भी पैदा होता है।

तैयारी के बाद परीक्षा दो बार बोर्ड परीक्षा होने से छात्रों को प्रदर्शन बेहतर बनाने का विकल्प मिलेगा। छात्र उस बोर्ड परीक्षा में उपस्थित हो सकता है, जिसके लिए वह तैयार हो। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक समग्र परीक्षा सामग्री बैंक तैयार किया जा सकता है, जिसका उपयोग सॉफ्टवेयर के माध्यम से परीक्षा लेने में उपयोग किया जा सकता है। दीर्घकाल में सभी बोर्ड को सेमेस्टर प्रणाली अपनाने की सलाह दी गई है।

Wednesday, August 23, 2023

पूर्व इसरो प्रमुख के सिवन ने इसरो के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग पर बधाई दी।

 नई दिल्ली, एएनआई। 7 सितंबर  साल 2019 का वो दिन जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (ISRO) के तत्कालीन प्रमुख के. सिवन की अध्यक्षता में चंद्रयान-2 कुछ तकनीकि खामियों के चलते सफल नहीं हो सका था। उस दिन से उनकी आंखे अपने अधूरे सपने के साकार होने की प्रतीक्षा कर रही थीं। 23 अगस्त 2023 (बुधवार) का दिन समस्त देशवासियों के साथ के. सिवन के लिए बहुत खास है।


#WATCH पूर्व इसरो प्रमुख के सिवन ने इसरो के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग पर बधाई दी।


उन्होंने कहा, "हम वास्तव में उत्साहित हैं...हम लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे। मैं बहुत खुश हूं।" pic.twitter.com/hOCim8QI9o


चंद्रयान-3 की सफलता पर क्या बोले के. सिवन ?

पूर्व इसरो प्रमुख के सिवन ने इसरो के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग पर बधाई दी। इस मौके पर उन्होंने कहा,


हम वास्तव में उत्साहित हैं...हम लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे। मैं बहुत खुश हूं।"


यह इसरो नहीं बल्कि पूरे देश की कामयाबी : के. सिवन

इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने चंद्रयान-3 की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए सरकार को भी कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ इसरो नहीं बल्कि पूरे देश की कामयाबी है।


इसरो के पूर्व अध्यक्ष बोले- नई-नई खोज को किया जाएगा पूरा

इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने ऐतिहासिक पल के इस शुभ अवसर पर के बड़ी बात कही कि चंद्रयान-3 का साइंस डाटा केवल भारत नहीं बल्कि ग्लोबल साइंटिस्ट यानी दुनियाभर के लिए होगा। उन्होंने कहा कि इस डाटा को दुनियाभर के वैज्ञानिकों द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा और इससे नई-नई खोज को पूरा किया जाएगा।